बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) बेंगलुरु, एनआईटी उत्तराखंड, यूनिवर्सिटी मलेशिया फांग अल-सुल्तान अब्दुल्ला, मलेशिया और कैस्टसार्ट यूनिवर्सिटी, थाईलैंड के सहयोग से तीन दिवसीय द्वितीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रीसेंट एडवांसेज इन फ्लूइड मकैनिक्स एंड नैनोइलैक्ट्रोनिक्स (आईसी-आरएएफएमएन-2024) का आयोजन किया गया।
कॉन्फ्रेंस में आईसीटी मुंबई के पूर्व कुलपति, पदमश्री अवॉर्डी, प्रोफेसर जी.डी. यादव मुख्य अतिथि रहे और विशेष अतिथि यूके के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जितेश एसबी गज्जर और बैंकॉक के कासेत्सार्ट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चावलित किट्टीचाईकरन थे।
प्रो. जी.डी. यादव ने जैविक, भौतिक, परमाणु और सीमा परत क्षेत्रों में फ्लूइड मकैनिक्स और नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापक अनुप्रयोगों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गणित इंजीनियरिंग और विज्ञान की कुंजी है। कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए यूएस, थाईलैंड, यूके, वेस्टइंडीज, यूएई, जर्मनी, तंजानिया, बांग्लादेश और मलेशिया जैसे विश्व भर से 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। यूनिवर्सिटी मलेशिया, ढाका यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ एज्यूकेशन, लाहौर, वेस्ट इंडीज मोना यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी सेन्स, यूएमपीएसए, यूनिवर्सिटी मलेशिया फांग अल-सुल्तान अब्दुल्ला, कासेत्सर्ट यूनिवर्सिटी, बैंकॉक के प्रतिभागियों ने अपना कार्य प्रस्तुत किया।
कॉन्फ्रेंस में इंजीनियरिंग और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में फ्लूइड मकैनिक्स और नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स के प्रयोगात्मक, विश्लेषणात्मक और कम्प्यूटेशनल पहलुओं जैसे विभिन्न विषयों को शामिल किया गया। आईसीआरएएफएमएन-2024 की संयोजक और गणित और सांख्यिकी विभाग की एचओडी, प्रो. कल्पना शर्मा ने उद्घाटन समारोह में सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का स्वागत किया। एनआईटी उत्तराखंड से आईसीआरएएफएमएन 2024 के चेयरपर्सन, डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी ने कॉन्फ्रेंस के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। उद्घाटन समारोह में एमआईटी बैंगलोर के डायरेक्टर, प्रोफेसर जगन्नाथ कोरोडी; एमयूजे की डीन एफओएस, प्रोफेसर ललिता लेडवानी; एमआईटी बैंगलोर के संयोजक डॉ राजशेखर वी. चौधरी भी उपस्थित थे। आईआईटी मद्रास से प्रो. तन्मय बसाक, आईआईटी खडग़पुर से प्रो. सुमन चक्रवर्ती, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से प्रो. पीजी सिद्धेश्वर, जादवपुर विश्वविद्यालय से प्रो. गोपाल चंद्रा, आईआईटी गुवाहाटी से प्रो. स्वरूप नंदन बोरा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के प्रो. बी.वी. रतीश कुमार, आईआईटी मद्रास के प्रो. प्रसाद पटनायक, एनआईटी राउरकेला, सुंदरगढ़ के प्रो. रविकांत अव्वारी, इलाहाबाद विवि., प्रयागराज के प्रो. सत्य देव, बिट्स-पिलानी गोवा के प्रोफेसर पी. दानुमजय, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद, प्रयागराज के डॉ. अभिषेक कुमार तिवारी सहित विभिन्न आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से भी अन्य वक्ताओं और प्रतिभागियों ने अपना कार्य प्रस्तुत किया। कॉन्फ्रेंस में 270 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

