नई दिल्ली,
भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को घरेलू प्लास्टिक निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है। उद्योग जगत के अनुसार यह समझौता भारत की हिस्सेदारी को अमेरिकी प्लास्टिक बाजार में मजबूत करने में सहायक होगा और निर्यात को नई दिशा देगा। आरएमजी पॉलिमर्स इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अरविंद गोयनका ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारतीय प्लास्टिक निर्यातकों के लिए अमेरिका के विशाल बाजार के द्वार खोलेगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका हर वर्ष लगभग 75 अरब डॉलर मूल्य के प्लास्टिक का आयात करता है, जबकि वर्तमान में भारत से अमेरिका को प्लास्टिक निर्यात करीब 2.2 अरब डॉलर का है।
गोयनका के अनुसार यह समझौता भारतीय कंपनियों के लिए स्वर्णिम अवसर है और आने वाले कुछ वर्षों में अमेरिका को होने वाला प्लास्टिक निर्यात दोगुना हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) का भी बड़ा खरीदार है। यदि अमेरिका भारत से प्लास्टिक और पीवीसी उत्पाद बड़ी मात्रा में खरीदता है तो इन उत्पादों की मांग अन्य देशों में भी बढ़ेगी। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता केवल प्लास्टिक उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
गोयनका ने बताया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 30 लाख करोड़ डॉलर के बराबर है और वहां की आबादी करीब 34 करोड़ है। अधिक आय के कारण वहां उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग अधिक रहती है। जब अमेरिका में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग बढ़ेगी तो भारत में भी उसी स्तर के उत्पादों का निर्माण होगा। इससे देश में बेहतर गुणवत्ता के सामान उपलब्ध होंगे और आम उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार बढ़ने से अन्य देशों को होने वाला निर्यात भी बढ़ेगा। उनका कहना था कि जब कोई उत्पाद अमेरिका को निर्यात होता है तो खाड़ी देशों, यूरोप और रूस जैसे क्षेत्रों में उसकी स्वीकार्यता स्वतः बढ़ जाती है। इसलिए अमेरिका के साथ व्यापार में वृद्धि से भारत को वैश्विक स्तर पर भी लाभ मिलेगा।

