नई दिल्ली: वैश्विक स्तर की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ रेटिंग्स ने भारत को बीते पाँच वर्षों में बड़े उभरते बाजारों में सबसे मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया है। यह आकलन ऐसे समय आया है जब दुनिया भर के वित्तीय बाजार व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में हैं। हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में मूडीज़ ने कहा कि भारत भविष्य के वैश्विक झटकों को झेलने के मामले में अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं—मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य नीतिगत ढांचा, तथा गहरे घरेलू पूंजी बाजार। इन कारणों से भारत की निर्भरता बाहरी और अस्थिर वित्तीय स्रोतों पर कम हो जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 के बाद से उभरते बाजारों को लगातार कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सबसे पहले कोविड-19 महामारी आई, इसके बाद कई दशकों में सबसे तेज वैश्विक महंगाई देखी गई। वर्ष 2022 में अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की गई, फिर 2023 में क्षेत्रीय बैंकिंग संकट और 2025 में टैरिफ दबाव बढ़े। मूडीज़ के अनुसार इन सभी कठिन परिस्थितियों के दौरान भारत ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी। देश में फंडिंग लागत में तेज बढ़ोतरी नहीं हुई और पूंजी बाजार तक पहुंच भी बनी रही, जबकि कई अन्य देशों को इन चुनौतियों से जूझना पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की मौद्रिक नीति स्पष्ट और स्थिर रही है। महंगाई को लेकर अपेक्षाएं नियंत्रित हैं और जरूरत के अनुसार विनिमय दर में समायोजन किया गया है। इससे निवेशकों का भरोसा बना रहता है, भले ही बाहरी परिस्थितियां कमजोर क्यों न हों। मूडीज़ ने यह भी उल्लेख किया कि भविष्य में किसी भी वैश्विक आर्थिक दबाव की स्थिति में भारत मजबूत और आसानी से उपयोग में आने वाले भंडार के साथ प्रवेश करेगा। तेज़ी से बदलते बाजारों में यह विशेषता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहां घरेलू बाजार और भंडार भारत की ताकत हैं, वहीं राजकोषीय गुंजाइश एक चुनौती बनी हुई है। अध्ययन में भारत की तुलना इंडोनेशिया, मेक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और तुर्की जैसी अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जिन्होंने महामारी के बाद अलग-अलग स्तर पर आर्थिक दबावों का सामना किया है।

