नई दिल्ली, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग इस समय लगभग 10लाख कुशल पेशेवरों की कमी का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत के पास इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला प्रमुख देश बनने का बड़ा अवसर है।
पटना स्थित Software Technology Parks of India केंद्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का वर्तमान आकार लगभग 800 अरब अमेरिकी डॉलर है और अगले एक वर्ष के भीतर इसके 1 खरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार करने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2032 तक दुनिया भर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर उद्योग को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए दो प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पहला, सेमीकंडक्टर अभिकल्पन क्षमता को विश्वस्तरीय बनाना और दूसरा, विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार करना। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार देश में उच्च गुणवत्ता वाली सेमीकंडक्टर अभिकल्पन क्षमताएं विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारतीय छात्र इस क्षेत्र में विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित प्रतिभाओं में शामिल हों।
मंत्री ने कहा कि जब विद्यार्थी सेमीकंडक्टर अभिकल्पन से जुड़े कौशल के साथ स्नातक होकर निकलें, तब उन्हें विश्व की अग्रणी प्रतिभाओं में गिना जाए और उन्हें उद्योग में तुरंत अवसर प्राप्त हों।
उन्होंने जानकारी दी कि सेमीकंडक्टर अभिकल्पन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से अब तक लगभग 75हजार विद्यार्थियों को आकर्षक अवसर प्राप्त हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 5 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। जैसे-जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे विनिर्माण से जुड़े कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भारत की सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अभिकल्पन, निर्माण और पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए देशभर में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इन पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत और भरोसेमंद भागीदार बनाना है। अपने दौरे के दौरान मंत्री ने देश के उभरते नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में स्थित एसटीपीआई केंद्रों को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है ताकि स्थानीय युवाओं और नवाचार आधारित उद्यमों को बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने युवा उद्यमियों से संवाद भी किया। उन्होंने उनके अनुभवों को सुना तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों के लिए सरकारी सहयोग को और प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की।

