Thursday, July 2, 2026 |
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भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम- 1’ के प्रक्षेपण की तैयारी पूरी

12 July से 4 August तक Launch Window तय

by Business Remedies
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Skyroot Aerospace Vikram-1 Private Orbital Rocket Ready For Launch At Satish Dhawan Space Centre

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट विक्रम- 1 के पहले परीक्षण मिशन के लिए 12 July से 4 August तक की Launch Window घोषित कर दी है।

इस मिशन का नाम मिशन आगमन रखा गया है। कंपनी के अनुसार रॉकेट का प्रक्षेपण 12 July से पहले नहीं किया जाएगा। अंतिम असेंबली, परीक्षण, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा में सभी तकनीकी प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने, मौसम की अनुकूल स्थिति, सुरक्षा मंजूरी और रेंज क्लियरेंस मिलने के बाद ही अंतिम प्रक्षेपण किया जाएगा। यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल श्रेणी का रॉकेट पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने का प्रयास करेगा। यदि यह मिशन सफल रहता है तो भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र को नई गति मिलेगी और निजी कंपनियों के लिए वैश्विक लॉन्च सेवाओं का रास्ता और मजबूत होगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार मिशन आगमन का मुख्य उद्देश्य उड़ान के प्रत्येक चरण के दौरान रॉकेट के प्रदर्शन से जुड़ा विस्तृत तकनीकी डेटा एकत्र करना है। इस डेटा के आधार पर रॉकेट की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा और भविष्य में होने वाले सुधारों के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह मिशन मुख्य रूप से तकनीक के प्रदर्शन और सीखने की प्रक्रिया पर आधारित है। वास्तविक उड़ान के दौरान मिलने वाला डेटा यह बताएगा कि रॉकेट विभिन्न परिस्थितियों में किस प्रकार कार्य करता है। इस जानकारी का उपयोग भविष्य की व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने में किया जाएगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा कि वास्तविक उड़ान में रॉकेट के प्रदर्शन को पूरी तरह समझना केवल प्रक्षेपण के बाद ही संभव होता है। उनके अनुसार विक्रम- 1 के उड़ान भरते ही भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक नए दौर में प्रवेश करेगा। इससे पहले November 2022 में कंपनी ने विक्रम- एस का सफल प्रक्षेपण किया था, जो भारतीय भूमि से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था। उस मिशन के माध्यम से कंपनी ने अपनी शुरुआती तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया था, जबकि विक्रम- 1 का उद्देश्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की क्षमता प्रदर्शित करना है।

कंपनी की योजना एक या दो सफल प्रदर्शन मिशनों के बाद नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की है। विक्रम- 1 की पहली उड़ान में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के विभिन्न पेलोड भी शामिल किए जाएंगे, जिससे यह आंशिक रूप से व्यावसायिक मिशन भी होगा। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी नागा भरत डाका ने कहा कि निजी भारतीय लॉन्च वाहन की अवधारणा से लेकर ऑर्बिटल मिशन की तैयारी तक का सफर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि विक्रम- एस ने कंपनी की तकनीकी नींव तैयार की, जबकि विक्रम- 1 विश्वसनीय और लगातार लॉन्च सेवा विकसित करने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने इस मिशन को सफल बनाने में भारत सरकार, इन-स्पेस, इसरो, निवेशकों, ग्राहकों तथा कंपनी के 1,000 से अधिक कर्मचारियों के योगदान की भी सराहना की। कंपनी ने जानकारी दी कि विक्रम- 1 के सभी चरणों को लॉन्च पैड पर सफलतापूर्वक एकीकृत कर दिया गया है। मिशन के दौरान विशेषज्ञ प्रणोदन प्रणाली, चरण पृथक्करण, मार्गदर्शन प्रणाली, नेविगेशन, नियंत्रण प्रणाली और रॉकेट के समग्र प्रदर्शन पर लगातार नजर रखेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर कंपनी पूर्ण रूप से व्यावसायिक लॉन्च सेवा प्रदाता बनने की दिशा में अगला कदम उठाएगी।



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