भारत में अप्रैल महीने में बढ़ती खुदरा महंगाई दर ने रसोई का बजट गड़बड़ा दिया है। महंगाई के कारण लोगों का बाहर खाना-पीना कम हो गया है, क्योंकि Commercial Gas की कीमतों में भारी उछाल आ गया है। Restaurant वालों ने खाने की दरों में भी इजाफा कर दिया है। अप्रैल माह में खुदरा दरें बढ़कर 3.48 फीसदी हो गई, जो मार्च के 3.40 फीसदी से अधिक है। हालांकि यह अभी भी Reserve Bank of India के 4 फीसदी लक्ष्य के भीतर है, लेकिन लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ाई है। महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों की महंगाई है। Food Inflation मार्च के 3.87 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 4.20 फीसदी हो गया। टमाटर की कीमतों में 35 फीसदी से अधिक उछाल आया है। हालांकि आलू और प्याज के दाम घटे हैं, लेकिन बाकी सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं ने कुल महंगाई बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में तनाव और Iran-संबंधित भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें बढ़ीं हैं। भारत तेल आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए परिवहन लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है। वहीं El-Nino और कमजोर मानसून की आशंका से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे दाल, सब्जियां, खाद्यान्न और महंगे हो सकते हैं।
ग्रामीण आय और Supply Chain प्रभावित हो सकती है। शादी सीजन और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी के दाम बढ़ गए हैं। Personal Care और विविध वस्तुओं में भी तेज महंगाई दर्ज हुई है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो मई-जून में महंगाई 4 फीसदी पार कर जाएगी।




