मुंबई : घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को मजबूती देखने को मिली। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी से बाजार हरे निशान में कारोबार करता दिखा। शुरुआती कारोबार में फार्मा और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के चलते Sensex और Nifty दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। Sensex करीब 462 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,071 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं Nifty लगभग 170 अंक यानी 0.72 प्रतिशत मजबूत होकर 23,581 के आसपास कारोबार करता दिखा।
सेक्टोरल आधार पर फार्मा, हेल्थकेयर, धातु, रसायन, बैंकिंग, ऊर्जा, सीमेंट और एफएमसीजी क्षेत्रों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन सभी सूचकांकों में 1प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों का रुझान विशेष रूप से दवा और बैंकिंग कंपनियों की ओर रहा। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दबाव बना रहा। Nifty आईटी सूचकांक गिरावट वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहा। एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टेक महिंद्रा के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। इन कंपनियों के शेयरों में लगभग 1प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई।
बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला India VIX भी 3प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों का पैसा अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि वहां का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भारतीय बाजार अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करता रहेगा, तब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार बिकवाली करते रहेंगे। इसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ेगा और रुपया कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्थिति में सुधार तभी संभव है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य हो जाए और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आए। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निवेश की वैश्विक दौड़ भी विदेशी निवेश को प्रभावित कर रही है। विश्लेषकों के मुताबिक रुपये में लगातार कमजोरी आने से आयातित महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल का उपयोग करने वाली कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि निर्यात आधारित कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है क्योंकि दवाइयों की मांग स्थिर रहती है और रुपये में कमजोरी का लाभ इस क्षेत्र को मिल सकता है। वस्त्र उद्योग को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को संभावित लाभार्थी माना जा रहा है, लेकिन वैश्विक दबाव के कारण इस क्षेत्र में फिलहाल कमजोरी बनी रह सकती है। कमोडिटी बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.52 प्रतिशत बढ़कर 106.18 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.71 प्रतिशत मजबूत होकर 101.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई लगभग सपाट रहा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। दूसरी ओर इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट और चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग 2 प्रतिशत तक कमजोर रहे। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई। वॉल स्ट्रीट में एसएंडपी 500 सूचकांक 0.59 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में 1.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।




