Wednesday, July 8, 2026 |
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भारत का ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ तेज, 2 साल में 35 देशों से हुई साझेदारी और 11 देशों से बातचीत जारी

रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने पर फोकस

by Business Remedies
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  • भारत ने 35 देशों के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने की रणनीति बनाई
  • 24 देशों के साथ साझेदारी, 11 देशों से बातचीत जारी; ऊर्जा सुरक्षा और हाई-टेक उद्योगों को मिलेगा बल

नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज | भारत ने बीते 24 महीनों में रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के 35 देशों को एक व्यापक रणनीतिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया है। इनमें 24 देशों के साथ विभिन्न समझौते और साझेदारियां हो चुकी हैं, जबकि 11 देशों के साथ बातचीत जारी है। इसका उद्देश्य देश की औद्योगिक जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरी, रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

सरकार द्वारा शेयर किए गए एक ग्राफिक मैप के अनुसार, भारत ने उत्तरी America, Europe, Africa, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और Australia तक अपनी साझेदारी नेटवर्क विकसित किया है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल खनिज आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि खोज, खनन, प्रोसेसिंग, तकनीक, निवेश और सप्लाई चेन को भी मजबूत बनाना है।

भारत ने America, Canada, Britain, Germany, France, Italy, Netherlands, Japan, Australia, Brazil, Argentina, DR Congo, Ghana, Namibia, Saudi Arabia, United Arab Emirates, Israel, Vietnam, Mozambique, Zimbabwe, Malawi, Japan और Russia के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग स्थापित किया है। इन साझेदारियों में क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ, सेमीकंडक्टर सहयोग, लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीकी सहयोग और खनिज संसाधनों के विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

ग्राफिक मैप के मुताबिक, भारत अभी Chile, Peru, Zambia, Bolivia, Kazakhstan, Mongolia, Uzbekistan, Kyrgyzstan, Turkmenistan, Tajikistan, Myanmar और Indonesia जैसे देशों के साथ भी विभिन्न समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिनमें खास तौर पर लिथियम, कॉपर, रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों पर सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

भारत की यह रणनीति केवल खनिज संसाधनों तक सीमित नहीं है। ग्राफिक में स्पष्ट रूप से सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है। Japan, Netherlands, Germany और America जैसे देशों के साथ सहयोग भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, रक्षा उपकरण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के साथ भारत की साझेदारी भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती दे सकती है। ग्राफिक मैप से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की रणनीति केवल खनिज खरीदने तक सीमित नहीं है। सरकार संयुक्त निवेश, खनिज खोज, प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सेमीकंडक्टर सहयोग और दीर्घकालिक सप्लाई चेन तैयार करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है, जिससे भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट का असर कम किया जा सके।



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