पुणे,
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार आईडीबीआई बैंक के विनिवेश प्रक्रिया को आगे भी जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, उसे अब दूर कर दिया गया है और सरकार अपने पुराने निर्णय पर कायम है। पहले चरण की बोली प्रक्रिया में प्राप्त प्रस्ताव सरकार द्वारा तय किए गए आरक्षित मूल्य से कम रहे थे, जिसके कारण पिछले महीने इस प्रस्तावित सौदे को रोकना पड़ा था। इससे यह आशंका बनी थी कि क्या बैंक का निजीकरण आगे बढ़ेगा या नहीं, लेकिन अब सरकार ने इसे जारी रखने का संकेत दे दिया है। मूल योजना के अनुसार सरकार को आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी थी, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम को 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करना था। इस तरह कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में उपलब्ध कराई जानी थी। उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर इस सौदे का अनुमानित मूल्य लगभग 72,000 करोड़ रुपये आंका गया था।
यह विनिवेश प्रक्रिया 7 January 2023 से चल रही है, जब निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग को इच्छुक बोलीदाताओं से कई अभिरुचि प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इसके बाद से यह प्रक्रिया विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के आपसी विलय को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव सामने नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर एक उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति विचार करेगी और आवश्यक सुझाव देगी।
निर्मला सीतारमण पुणे में भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय प्रधान कार्यालय, महाराष्ट्र सर्कल के नए परिसर के उद्घाटन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार घरेलू गतिविधियां होनी चाहिए, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र, जो न केवल देश की जरूरतों को पूरा करता है बल्कि विदेशी बाजारों में भी आपूर्ति कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा आकार और मजबूत घरेलू खपत बड़े बैंकों की आवश्यकता को दर्शाता है।
वित्त मंत्री के अनुसार, घरेलू मांग ही देश की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता रहती है और निर्यात पर दबाव पड़ता है, तब भी भारतीय निर्यातक अपनी कुशलता और नवाचार के माध्यम से नए बाजार तलाश रहे हैं। विभिन्न शुल्क और अन्य वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यातक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी वृद्धि को बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

