New Delhi,
भारत की मुद्रा रुपया फिलहाल दबाव में जरूर है, लेकिन लंबे समय के नजरिए से यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर बन सकती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने रुपया को “मूल रूप से कम मूल्यांकित” बताते हुए कहा कि दीर्घकाल में इसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है। ब्लूमबर्ग को दिए गए अपने बयान में नागेश्वरन ने कहा कि वर्तमान स्तर पर रुपया का मूल्यांकन निवेशकों के लिए अच्छा प्रवेश बिंदु प्रदान करता है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत की विकास क्षमता पर भरोसा रखते हैं।
लगातार दबाव में रुपया, पांचवें दिन भी गिरावट
शुक्रवार को रुपया लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में यह 24 पैसे टूटकर 94.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वैश्विक परिस्थितियों के चलते मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा रही है। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपया पर अतिरिक्त दबाव डाला है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी इस महीने ही पिछले वर्ष के कुल 18.79 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी है।
एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बना रुपया
साल 2026 में अब तक रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा के रूप में उभरा है। पिछले वर्ष की गिरावट का सिलसिला इस वर्ष भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भरता के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर रुपया पर पड़ता है, खासकर जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है। इन चुनौतियों के बावजूद नीति-निर्माताओं का दृष्टिकोण संतुलित बना हुआ है। संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने अपने अनुमान घटाए हैं।
वैश्विक हालात का असर लंबे समय तक संभव
नागेश्वरन ने पहले भी चेतावनी दी थी कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं और सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने बताया कि मौजूदा संघर्ष का असर चार प्रमुख माध्यमों से पड़ सकता है—ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा, परिवहन और बीमा लागत में बढ़ोतरी, तथा प्रवासी आय में संभावित कमी। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को सामान्य होने में समय लगेगा और इसके लिए धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा।

