भारत अब दुनिया के लगभग आधे Global Capability Centres (GCCs) का केंद्र बन चुका है और Enterprise AI Talent के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। यह उपलब्धि देश की बढ़ती नवाचार क्षमता, तकनीकी दक्षता और वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य वाले व्यावसायिक संचालन में मजबूत भूमिका को दर्शाती है। यह जानकारी मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार को दी।
Confederation Of Indian Industry (CII) GCC Business Summit को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत का GCC क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव से गुजरा है। पहले जहां यह केवल कुछ बैक-ऑफिस संचालन तक सीमित था, वहीं आज देश में 2,000 से अधिक GCCs संचालित हो रहे हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में रोजगार का आंकड़ा अब 23 लाख की ओर बढ़ रहा है। वहीं, वार्षिक राजस्व 60 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और आने वाले समय में इसके 100 अरब डॉलर के करीब पहुंचने की संभावना है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आज दुनिया के लगभग आधे GCCs भारत में मौजूद हैं। यह उपलब्धि संयोग नहीं है, बल्कि भारतीय प्रतिभा, कौशल और क्षमता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियां शुरुआत में लागत कम करने के उद्देश्य से भारत आई थीं, लेकिन यहां की विशेषज्ञता और उत्कृष्ट कार्यक्षमता के कारण उन्होंने अपने संचालन का विस्तार किया।
उन्होंने बताया कि GCCs अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। साथ ही, देश के प्रमुख शहरों में विकसित होने वाले नए कार्यालय क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पैमाने पर GCCs का संचालन किसी अन्य देश में नहीं हो रहा है और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय GCCs अब केवल कम लागत वाली बैक-ऑफिस सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं। आज ये तकनीक, इंजीनियरिंग, अनुसंधान, उत्पाद विकास, विश्लेषण और डिजिटल परिवर्तन जैसे उच्च मूल्य वाले कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वैश्विक बैंक मुंबई और बेंगलुरु से जोखिम प्रबंधन प्रणाली और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म संचालित कर रहे हैं। वहीं, वाहन निर्माता कंपनियां चेन्नई और पुणे से वाहनों तथा एम्बेडेड सिस्टम का डिजाइन तैयार कर रही हैं। अर्धचालक कंपनियां भारत में चिप डिजाइन कर रही हैं, औषधि कंपनियां क्लिनिकल विश्लेषण का कार्य कर रही हैं और उपभोक्ता उत्पाद कंपनियां अपने भारतीय केंद्रों से डिजिटल उत्पाद विकसित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन भारतीय GCCs में तैयार होने वाली बौद्धिक संपदा वास्तविक और वैश्विक स्तर की है। पेटेंट यहीं दाखिल किए जा रहे हैं, उत्पाद यहीं से विकसित होकर दुनियाभर में पहुंच रहे हैं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी भारत में कार्यरत पेशेवरों को सौंपी जा रही हैं। उनके अनुसार, भारतीय GCCs अब अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं।

