Thursday, July 9, 2026 |
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India का वैश्विक FTA नेटवर्क विस्तार पर बड़ा दांव, यूरोपीय संघ समझौते के बाद कई देशों से तेज हुई बातचीत

by Business Remedies
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India expanding global FTA network after landmark European Union trade agreement

भारत ने यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता पूरा करने के बाद अब दुनिया के अधिक से अधिक देशों के साथ व्यापारिक साझेदारी बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा दिए हैं। Date: 9 जुलाई। भारत का लक्ष्य अब उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, खाड़ी क्षेत्र और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नए मुक्त व्यापार समझौते करके वैश्विक व्यापार में अपनी भागीदारी को और मजबूत बनाना है। यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन ने वाशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत की मौजूदा व्यापार नीति का उद्देश्य दुनिया के लगभग हर बड़े क्षेत्र के साथ व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि सरकार एक साथ कई देशों के साथ बातचीत कर रही है और व्यापारिक साझेदारियों को विविध बनाने तथा नए बाज़ारों तक पहुंच बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है।

दर्पण जैन के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में भारत जिन देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है, वे वैश्विक व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हैं। अब सरकार उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है जहां भारत की व्यापारिक उपस्थिति अभी अपेक्षाकृत सीमित है। उत्तरी अमेरिका में भारत कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है, जबकि मेक्सिको के साथ भी प्रारंभिक चर्चा शुरू हो चुकी है। वहीं लैटिन अमेरिका में चिली और पेरू के साथ वार्ता जारी है। इसके अलावा भारत मर्कोसुर समूह के साथ अपने मौजूदा वरीयता व्यापार समझौते का दायरा बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है, ताकि उस क्षेत्र में भारतीय व्यापार को नई गति मिल सके।

खाड़ी क्षेत्र में भी भारत अपनी रणनीति को मजबूत बना रहा है। संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ पहले से मौजूद व्यापार समझौतों के बाद अब क़तर, खाड़ी सहयोग परिषद और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी बातचीत आगे बढ़ाई जा रही है। इससे ऊर्जा, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। अफ्रीका भी भारत की प्राथमिकता सूची में शामिल है। भारत दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ और केन्या के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। सरकार का मानना है कि अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाकर भारतीय उद्योगों और निर्यातकों को नए बाज़ार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

पूर्वी देशों के संदर्भ में भारत पहले ही जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और आसियान सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है। वहीं ओशिनिया क्षेत्र में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पूरे किए गए हैं। दर्पण जैन ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता भारत के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों में से एक है। यह केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय उत्पादों को अधिक देशों के बाज़ारों तक पहुंच दिलाने, निर्यातकों की चुनौतियों को कम करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक सोच में अब व्यापक बदलाव दिखाई दे रहा है। सरकार केवल निर्यात बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आवश्यक आयात के प्रति भी अधिक खुला दृष्टिकोण अपना रही है। इसका उद्देश्य भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अधिक मजबूत बनाना है। उधर यूरोपीय संघ भी इसी प्रकार की रणनीति पर काम कर रहा है। यूरोपीय संघ के मुख्य वार्ताकार क्रिस्टोफ़ कीनर ने बताया कि उनका संगठन पहले ही अपने लगभग 50 प्रतिशत व्यापार को वरीयता प्राप्त व्यापार समझौतों के दायरे में ला चुका है। अब उसका ध्यान भारत-प्रशांत क्षेत्र में थाईलैंड, फ़िलिपींस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौते पूरे करने पर केंद्रित है।



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