Thursday, July 9, 2026 |
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गुजरात ने निवेश आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर नीति 2026-29 शुरू की

by Business Remedies
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Gujarat Government Launches Data Centre Policy 2026-29 In Gandhinagar

गांधीनगर,

गुजरात सरकार ने गुरुवार को विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29 शुरू की। इस नीति का उद्देश्य बड़े डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचा और डिजिटल सेवाओं में निवेश बढ़ाना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में नीति पुस्तिका जारी की। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, मुख्य सचिव मनोज कुमार दास, वरिष्ठ अधिकारी और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी.भारती ने कहा कि यह नीति भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि डेटा अब तेल से भी अधिक मूल्यवान हो गया है। हर डिजिटल भुगतान, हर कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल, हर क्लाउड सेवा, हर ऑनलाइन लेनदेन, हर सरकारी सेवा और हर नवाचार डेटा पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का करीब 20 प्रतिशत डेटा पैदा करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी केवल करीब 3 प्रतिशत है। इसके उलट अमेरिका और चीन के पास मिलकर दुनिया की करीब 70 प्रतिशत क्षमता है।

पी.भारती ने कहा कि भारत का भविष्य का डिजिटल ढांचा कहां बनेगा, इसका जवाब देने के लिए गुजरात तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात में 2 केबल लैंडिंग स्टेशन बनाए जाने की योजना है और एक और परियोजना की घोषणा जल्द की जाएगी। इससे राज्य की अंतरराष्ट्रीय संपर्क क्षमता मजबूत होगी। नीति के अनुसार, गुजरात ने डेटा सेंटर को रणनीतिक ढांचा माना है। इसके तहत पूंजी सहायता, ब्याज सहायता, बिजली दर सहायता, राज्य वस्तु एवं सेवा कर वापसी, बिजली शुल्क वापसी, समुद्री जल शुद्धिकरण संयंत्रों के लिए सहायता और स्टाम्प शुल्क छूट जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, नीति में गैर-वित्तीय प्रोत्साहन भी शामिल हैं, ताकि बड़े डेटा सेंटर निवेश और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल बनाया जा सके।

नीति दस्तावेज में कहा गया है कि गुजरात के पास 69 गीगावाट स्थापित बिजली क्षमता है, जिसमें से 47 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से आती है। राज्य में धोलेरा और गिफ्ट सिटी जैसे औद्योगिक केंद्र भी मौजूद हैं। दस्तावेज के अनुसार, इस दशक के अंत तक वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता करीब 200 गीगावाट तक पहुंच सकती है। गुजरात इस विस्तार में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है और 2047 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को समर्थन देना चाहता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि भारत पहले की कई औद्योगिक क्रांतियों में पीछे रह गया था, लेकिन टीका निर्माण जैसे क्षेत्रों में देश ने नेतृत्व दिखाया है। अब भारत अर्धचालक क्षेत्र में भी बड़ा खिलाड़ी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विकास का अगला चरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग से आगे बढ़ेगा। उन्होंने डेटा को विकासशील अर्थव्यवस्था का नया तेल कुआं बताया। मोढवाडिया ने कहा कि अमेरिका में करीब 5,500 डेटा सेंटर हैं और ब्रिटेन में 500 से अधिक हैं, जबकि भारत में करीब 200 डेटा सेंटर हैं। अमेरिका के पास करीब 30 गीगावाट स्थापित डेटा सेंटर क्षमता है, जबकि भारत में यह क्षमता करीब 2 से 3 गीगावाट है। निर्माणाधीन परियोजनाओं के बाद भारत की क्षमता करीब 8 गीगावाट तक पहुंच सकती है।

मंत्री ने कहा कि गुजरात को पहले ही करीब 10 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता के प्रस्ताव मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल डेटा सेंटर की बात नहीं है, बल्कि पूरे कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र का हिस्सा है। यदि गुजरात डेटा सेंटर में अग्रणी बनता है, तो राज्य देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र का प्रमुख केंद्र बन सकता है। मोढवाडिया ने कहा कि राज्य सरकार गुजरात में 8 गीगावाट तक डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना चाहती है। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया और कहा कि सरकार राज्य के डिजिटल ढांचे के विकास में पूरा सहयोग देगी।



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