बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, जिससे अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से भारतीय निर्यात पर पडऩे वाले नकारात्मक असर की भरपाई हो सकेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक कारणों से भारत रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा, क्योंकि कच्चा तेल देश के आयात बिल में सबसे महंगा मद है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान अब इस बात पर है कि 22 सितम्बर से लागू होने वाली जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक जरूर पहुँचे। उन्होंने बताया, “22 सितम्बर के बाद हमारे पास काफी काम रहेगा। यह बड़ा निगरानी अभियान है और हमें पूरा भरोसा है कि इसका फायदा आम जनता को मिलेगा।” सीतारमण ने कहा कि सरकार विभिन्न पक्षों और उद्योग जगत से लगातार बातचीत कर रही है ताकि दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुँचे। उन्होंने बताया कि सांसद भी अब ज़मीन पर दरों की निगरानी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर पश्चिमी देशों के दबाव पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का निर्णय केवल आर्थिक पहलुओं पर आधारित है। उन्होंने कहा, “तेल विदेशी मुद्रा से जुड़ा बड़ा मद है और हमारे आयात बिल का सबसे महंगा हिस्सा है, इसलिए हम निश्चित रूप से रूसी तेल खरीदते रहेंगे।”
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क के असर पर उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू मांग और वृद्धि बढ़ेगी, जिससे निर्यात पर नकारात्मक असर की भरपाई हो जाएगी। साथ ही, सरकार उन क्षेत्रों के लिए विशेष उपाय करेगी जिन्हें टैरिफ वृद्धि से नुकसान पहुँचा है। नए जीएसटी ढांचे में अब सिर्फ दो प्रमुख स्लैब होंगे 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत। पहले की 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की दरें खत्म कर दी गई हैं। इससे अधिकांश वस्तुएं और सेवाएं सस्ती होंगी। वहीं विलासिता और नशीली वस्तुओं जैसे पान मसाला, तंबाकू, सॉफ्ट ड्रिंक, महंगी कारें, यॉट और निजी विमान पर 40 प्रतिशत कर लगाया गया है ताकि राजस्व संतुलन बना रहे। इसके साथ ही पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान की गई है, रिफंड जल्दी मिलेगा और अनुपालन लागत कम होगी। इससे खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग तथा नये स्टार्टअप को राहत मिलेगी।
सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ महीने पहले ही उनसे जीएसटी व्यवस्था को नया रूप देने के लिए कहा था। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर था कि व्यवस्था को सरल बनाया जाए और मध्यम वर्ग का बोझ कम हो। उन्होंने कहा कि नया जीएसटी 2.0 विवादों को कम करने और व्यवसायों व राज्यों दोनों के लिए स्पष्टता लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

