Sunday, July 12, 2026 |
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‘फ्रॉड से लडऩे और व्यापार वृद्धि के लिए टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण’

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज

भारत की डिजिटल क्रांति के मद्देनजर अगले कुछ वर्षों में 1 अरब यूपीआई लेन-देन होने की संभावना है। फिलहाल, दुनिया के कुल डिजिटल भुगतानों में से 46 प्रतिशत भुगतान भारत में होता है और इसके साथ यह डिजिटल भुगतान में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व के रूप में उभर रहा है। भारत की तेजी बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान ऐसी रणनीति है, जिसका लाभ उठाना अनिवार्य है। हालांकि, डिजिटल भुगतान में वृद्धि के कारण ऑनलाइन फ्रॉड भी बढ़ा है।

पिछले तीन साल में ही, ऑनलाइन घोटालों से 1.25 लाख करोड़ रुपये का सामूहिक नुकसान हुआ है। इससे लडऩे के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लोगों और व्यवसायों की सुरक्षा पर केंद्रित विभिन्न समितियों का गठन किया है, और वित्तीय क्षेत्र इन खतरों से निपटने के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी विभिन्न व्यवसायों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, साथ ही उन्हें देश की विस्तृत होती डिजिटल अर्थव्यवस्था से लाभ उठाने में भी मदद करती है।

कैशफ्री पेमेंट्स के सीईओ और सह-संस्थापक आकाश सिन्हा ने कहा कि आज के डिजिटल परिदृश्य में, फ्रॉड वाले लेनदेन से सुरक्षा को प्राथमिकता देना, व्यवसायों के लिए वित्तीय नुकसान से बचने और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण है। एआई और एमएल एल्गोरिदम का उपयोग करने वाले टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन का लाभ उठाने से फ्रॉड से काफी हद तक सुरक्षित हुआ जा सकता है। ये उन्नत समाधान भारत में ऑनलाइन लेन-देन के लिए सुरक्षा ढांचे को बदल रहे हैं और कारोबारियों को बेजोड़ सुरक्षा तथा मन की शांति प्रदान कर रहे हैं। आज, व्यवसायों को फ्रॉड से संबंधित नुकसान से बचाने और ग्राहकों का विश्वास बढ़ाने के लिए सुरक्षित भुगतान समाधान की जरूरत है।

आकाश सिन्हा ने कहा कि कई व्यवसाय या तो फ्रॉड और रिस्क डिटेक्शन उपकरणों के महत्व को अनदेखा करते हैं या ऐसे उपकरणों का उपयोग करते हैं जो वास्तविक समय में धोखाधड़ी वाले लेन-देन को रोक नहीं सकते हैं। इसके अतिरिक्त, फ्रॉड रोकने के लिए प्रभावी समाधान तैयार करने के लिए अक्सर विशेष प्रमाणन की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि जब ग्राहक अपने लेन-देन के बारे में सुरक्षित महसूस करते हैं, तो उनके बार-बार खरीदारी करने और दूसरों को उक्त व्यवसाय की सिफारिश करने की संभावना अधिक होती हैं, जिससे वृद्धि को बढ़ावा मिलता है। टेक्नोलॉजी-आधारित भुगतान समाधानों में रिस्क मैनेजमेंट की पूरी क्षमता होती हैं। एन्क्रिप्शन और टोकनाइजेशन जैसे डाटा सुरक्षा उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी ग्राहकों का डाटा सुरक्षित है, जिससे डाटा ब्रीच होने की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा, मजबूत रिस्क मैनेजमेंट प्रणाली कंपनियों को विनियामक दायित्वों को पूरा करने में सहायता कर सकती है, जिससे अतिरिक्त जोखिम कम हो सकते हैं।

आकाश सिन्हा ने कहा, कि कैशफ्री पेमेंट्स में, हमने साइबर क्राइम से निपटने के लिए व्यवसायों को व्यापक रिस्क मैनेजमेंट समाधान प्रदान करने के संबंध में विस्तृत शोध के जरिये ‘रिस्कशील्ड’ तैयार किया है। उच्च चार्जबैक और धोखाधड़ी जैसी परेशानी को दूर करने के लिए तैयार रिस्कशील्ड, वित्तीय सेवाओं, ई-कॉमर्स और यात्रा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी है। उन्नत एआई और एमएल एल्गोरिदम के जरिये रिस्कशील्ड व्यवसायों को धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को 40 प्रतिशत तक कम करने में मदद करता है।

आधुनिक व्यावसायिक दुनिया में, कंपनियां तभी सफल हो सकती हैं जब वे परिष्कृत फ्रॉड डिटेक्शन प्रणालियों, सुरक्षित पेमेंट गेटवे टेक्नोलॉजी और व्यापक कस्टमर वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं में निवेश करना शुरू करें।

 



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