बिजऩेस रेमेडीज/मुंबई जब शेयर बाजार में तेज गिरावट आती है, तो निवेशकों में घबराहट फैल जाती है और कई निवेशक तो जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। ऐसी स्थिति में घबराकर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में योगदान बंद करना या जितने साल का लक्ष्य है, उस समय से पहले अपने निवेश को भुनाना निवेशकों को एक सुरक्षित कदम की तरह लग सकता है। लेकिन वास्तव में यह आपके फाइनेंशियल हेल्थ के लिए नुकसानदायक है। SIP के पीछे मूल सिद्धांत रुपी कास्ट एवरेजिंग है और इसे बाजार की अस्थिरता के दौरान निवेशकों के हित में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। वास्तव में, जब आप लोअर मार्केट लेवल पर एसआईपी जारी रखते हैं, तो आप अपने समान मंथली निवेश की राशि से अधिक यूनिट खरीद सकते हैं, क्योंकि नेट एसेट वैल्यू ((NAV) कम होती है। यह रणनीति सुनिश्चित करती है कि जब बाजार में रिकवरी आती है, तो इन बढ़ी हुई यूनिट पर आपको ज्यादा लाभ होता है।
निवेश बनाए रखना क्यों जरूरी है : Baroda BNP Pariba एएमसी द्वारा की गई एक स्टडी से पता चलता है कि पिछले 2 दशक में, ऐसे 13 मौके आए, जब एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स ने 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की। इनमें से 11 मौकों पर, इंडेक्स ने एक साल बाद पॉजिटिव रिटर्न दिया। इसके अलावा, इनमें से 9 मौकों पर रिटर्न दोहरे अंकों में था, जबकि औसत रिटर्न 21 फीसदी रहा। अगर आप 10 फीसदी की गिरावट के बाद भी निवेश के लिए 3 साल तक समय-सीमा बढ़ाते हैं, तो निगेटिव रिटर्न का एक भी उदाहरण नहीं था।घबराहट में बेचने से सिर्फ घाटा ही बढ़ता है, जबकि निवेश बनाए रहने से टाइम और कंपाउंडिंग निवेशक के पक्ष में काम करते हैं। जब बाजार में घबराहट होती है तो हम अपनी दौलत नहीं गंवाते हैं, बल्कि जब हम घबराते हैं तो हम अपने पैसों का नुकसान कर लेते हैं।एसआईपी बंद करने से, निवेशक लोअर प्राइस पर यूनिट जमा करने का अवसर खो देता है। इसके अलावा, अक्सर निचले स्तरों पर जल्दबाजी में बाहर निकलने से सिर्फ घाटा ही बढ़ता है। नतीजा यह होता है कि निवेशक बाजार में अगले मूवमेंट से होने वाले संभावित लाभ से चूक जाता है।
बाजार में उतार-चढ़ाव से कैसे निपटें : हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव टेंशन बढ़ाने वाला हो सकता है, लेकिन यह लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो का फिर से मूल्यांकन करने का एक सुनहरा अवसर पेश करता है। इस डर का उपयोग प्रोडक्टिवली यह मूल्यांकन करने के लिए करें कि आपका वर्तमान एसेट एलोकेशन आपकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप है या नहीं। अक्सर, बुल मार्केट यानी तेजी वाले बाजारों में निवेशक दूसरों को फॉलो करते हुए या हाल ही में टॉप प्रदर्शन करने वाली कैटेगरी को देखकर निवेश करते हैं। लेकिन हर निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता, लिक्विडिटी की जरूरतें और टाइम लिमिट अलग-अलग होती है। बाजार में करेक्शन एक चेतावनी के रूप में काम करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी का पोर्टफोलियो उसके अपने लक्ष्य, जोखिम लेने की क्षमता और लिक्विडिटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सही तरीके से तैयार किया गया है।
एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी : लार्ज और मिडकैप फंड / मल्टीकैप फंड / फ्लेक्सीकैप फंड : उन निवेशकों के लिए जो लंबी अवधि में अपनी दौलत में इजाफा करना चाहते हैं और इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव को झेलने की क्षमता रखते हैं, ये फंड कैटेगरी अच्छे विकल्प होंगे। क्योंकि इनमें मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से पोर्टफोलियो मिक्स होता है, जो मार्केट के किसी खास सेगमेंट में तेज उतार-चढ़ाव के असर को कम करता है।
हाइब्रिड इक्विटी स्कीम / बैलेंस्ड एडवांटेज फंड : ये योजनाएं निश्चित रूप से ऐसे निवेशकों के लिए सावधानी से विचार करने योग्य हैं, जिन्हें हाल ही में 10 फीसदी की गिरावट ने यह अहसास जगा दिया है कि इक्विटी निवेश में अप-डाउन हो सकता है, लेकिन जो अभी भी भारत में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले लॉन्ग टर्म एसेट क्लास के रूप में स्टेटस के लिए इक्विटी होल्डिंग चाहते हैं।
मल्टी-एलोकेशन फंड : जो निवेशक इस कहावत में विश्वास करते हैं कि, ‘अपने सभी एग्स एक ही टोकरी में न रखें’, यानी इक्विटी की एक ही कैटेगरी में निवेश करना समझदारी नहीं है, उनके लिए एक दूसरे से लो को-रिलेशन वाले मल्टी एसेट क्लास का मिक्स एक पसंदीदा विकल्प हो सकता है।
निवेश का सबसे महत्वपूर्ण सबक : खबरों में चल रही सुर्खियों और बाजार में उतार-चढ़ाव से परेशान निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि :‘बाजार में समय बिताना है, न कि बाजार का टाइमिंग तय करना,’ यह निर्धारित करता है कि कोई निवेशक सस्टेनेबल और महंगाई को मात देने वाला रिटर्न हासिल करता है या नहीं। जो निवेशक लक्ष्य पर कायम व अनुशासित रहेंगे, वे कंपाउंडिंग का लाभ उठाएंगे व लंबी अवधि में हाई रिटर्न हासिल करेंगे।
मुख्य बातें :
निवेश बनाए रखें : शॉर्ट टर्म अस्थिरता के चलते अपने वित्तीय लक्ष्यों से न भटकें।
एसआईपी और रुपी कास्ट एवरेजिंग का लाभ उठाएं : बाजार में गिरावट के दौरान निवेश जारी रखें।
अपने पोर्टफोलियो का आकलन करें और उसे फिर से व्यवस्थित करें : सुनिश्चित करें कि आपका रिस्क एक्सपोजर आपकी वित्तीय योजना और जोखिम उठाने की क्षमता से मेल खाता है।
लॉन्ग टर्म की सोचें : ज्यादा दौलत बनानी है तो समय के साथ कंपाउंडिंग का लाभ उठाएं।

