एक 40 वर्षीय पुरुष, जो लंबे समय से शराब सेवन का आदी था, गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हुआ। मरीज में Acute-on-Chronic Liver Failure (ACLF) के लक्षण पाए गए, जिनमें पीलिया, पेट में सूजन, मानसिक स्थिति में बदलाव और अत्यधिक कमजोरी शामिल थे। शुरुआती जांच में लिवर की स्थिति बेहद खराब, खून जमने की समस्या (coagulopathy), पेट में पानी (ascites) और hepatic encephalopathy के संकेत मिले, जिससे मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक मानी जा रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार ACLF एक गंभीर स्थिति है, जिसमें अल्प समय में मृत्यु दर 40–60% तक हो सकती है। ऐसे मामलों में अक्सर लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प माना जाता है।
डॉ धीरज सैनी (पेट आंत एवं लीवर रोग विशेषज्ञ) एवं टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को Multidisciplinary Approach के साथ संभाला। मरीज को सख्त रूप से शराब छोड़ने की सलाह दी गई, साथ ही पोषण, संक्रमण नियंत्रण, Ascites मैनेजमेंट और लिवर सपोर्ट की दवाइयों के जरिए गहन इलाज किया गया। शुरुआती दिनों में मरीज को हाई-डिपेंडेंसी यूनिट में लगातार निगरानी में रखा गया।
करीब दो महीनों के इलाज के बाद मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला। उसकी मानसिक स्थिति सामान्य हुई, पीलिया में कमी आई और सभी जांच रिपोर्ट्स स्थिर होने लगीं। पेट में पानी भी नियंत्रित हो गया और दोबारा encephalopathy के लक्षण नहीं दिखे।
इस केस की खास बात यह रही कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद मरीज बिना लिवर ट्रांसप्लांट के ही पूरी तरह ठीक हो गया, जो ऐसे मामलों में काफी दुर्लभ माना जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार यह केस इस बात का उदाहरण है कि समय पर इलाज, सही देखभाल और शराब से पूरी तरह दूरी बनाकर लिवर की गंभीर बीमारी को भी काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
मरीज फिलहाल नियमित फॉलो-अप में है और उसे जीवनभर शराब से दूर रहने व स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी गई है।

