– छोटे उद्योगों को मशीनरी के लिए ब्याज दर में छूट का सुझाव
– राज्य सरकार ने उद्योग संगठनों के साथ ही बैठक
जयपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने व प्रोत्साहन के लिए राजस्थान इनवेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (रिप्स) में बदलाव के लिए दो दिन पहले उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में रिप्स 2024 के लिए उद्यमियों से सुझाव लिए गए। सचिवालय में हुई इस बैठक में एसीएस वित्त अखिल अरोड़ा, प्रमुख सचिव डॉ. के.के.पाठक, मुख्य आयुक्त वाणिज्यिकर विभाग डॉ. रवि कुमार सुरपुर और उद्योग आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने हिस्सा लिया।
बैठक में उद्यमियों ने सरकार को सुझाव दिया कि छोटे उद्योगों को मशीनरी लगाने के लिए ब्याज दर में छूट दी जाए। जिससे उद्यमियों को सहूलियत हो सके। साथ ही एक सुझाव यह भी आया कि रीको औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट की री-सेल पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी जाए। साथ ही निवेश सब्सिडी की सीमा को भी सात साल से बढ़ाकर 10 वर्ष किया जाए। इसके अलावा कृषि व डेयरी कलस्टर को थ्रस्ट एरिया में शामिल किया जाए। अन्य उद्योग संगठनों ने भी बैठक में सुझाव दिए।
बैठक में फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी), राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एंप्लायर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान, अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) तथा लघु उद्योग भारती समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने नई नीति के लिए सरकार को सुझाव दिए। सरकार उपयुक्त सुझावों को रिप्स में शामिल करेगी।
वर्जन
सरकार को नए निवेश को आकर्षित करने के लिए पुराने निवेशकों और उद्योगपतियों की समस्याओं का निराकरण करना होगा। प्रदेश में पहले से औद्योगिक निवेश कर चुके उद्योगपति सरकार के लिए सही मायने में ब्रांड एम्बेसडर की भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए सरकार को प्रदेश के पुराने निवेशकों को प्रोत्साहित करना चाहिए। सरकार को फोर्टी के सुझावों को रिप्स-2024 में शामिल करना चाहिहए
ताकि विकसित भारत के साथ राजस्थान भी विकसित बन सके।
– सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष, फोर्टी
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– किसी भी स्टेट को इनवेस्टमेंट चाहिए तो उसे पांच चीजों पर ध्यान देना पड़ेगा। पहला जमीन, दूसरा बिजली, तीसरा इंफ्रा, चौथा पॉलिसी और पांचवां पॉलिसी मेकर। जमीन पूरी तरह से निशुल्क होनी चाहिए। बिजली की दर सभी शुल्क मिलाकर 6 रुपए प्रति यूनिट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साथ ही इंफ्रा पर विशेष फोकस करना होगा। आप नए इंडस्ट्रीयल एरिया को डवलप करो, लेकिन पुराने इंडस्ट्रीयल एरिया को भी संभालना पड़ेगा। इसके अलावा स्पेशल थ्रस्ट एरिया में निवेशकों को 50 फीसदी सब्सिडी तथा फायर सेस से मुक्ति का सुझाव दिया।
– एन.के.जैन, दी एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान
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– नई इकाइयों के लिए एकल विंडो योजना लागू की जाए। जिससे समय पर कार्य पूर्ण हो सकें। अन्य राज्यों की तरह प्रदेश में बिजली दरों में कमी की जाए। वर्किंग कैपिटल व भूमि पर भी एमएसएमई को छूट प्रदान की जाए। इसके अलावा रिप्स में आने वाली औद्योगिक इकाइयों के साथ ही वेयरहाउस, गोदाम, लॉजिस्टिक व नए स्टार्टअप को भी शामिल किया जाए। सोलर ऊर्जा के लिए औद्योगिक इकाइयों के प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार विशेष योजना लागू करे। नई औद्योगिक इकाइयों को स्टाम्प ड्यूटी की छूट मिलना सुनिश्चित करें। इसके अलावा रीको औद्योगिक क्षेत्र में लगने वाली नई इकाइयों पर ट्रांसफर चार्ज, सबडिविजन चार्ज व अन्य पर छूट दी जाए।
– जगदीश सोमानी, अध्यक्ष, विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र, एसोसिएशन, जयपुर
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– सिंगल विडो सिस्टम को फिर से लागू किया जाए। प्लांट एंड मशीनरी की खरीद पर छूट दी जाए। साथ ही निवेश पर सब्सिडी जो अभी तक सात वर्ष दी जाती है। इसे बढ़ाकर 10 वर्ष किया जाना चाहिए। सभी निवेशकों को योजना का लाभ दिया जाए। सेक्टर में निवेश राशि सीमा 50 से घटाकर 30 करोड़ की जाए। इसके अलावा फ्रेट सब्सिडी बढ़ाने का सुझाव दिया।
– डॉ. अरुण कुमार अग्रवाल, महासचिव, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
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