New Delhi,
भारत के बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वितरण की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च को समाप्त पखवाड़े तक देश में बैंकों का कुल ऋण लगभग 213.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह वृद्धि करीब 11 प्रतिशत थी, जिससे स्पष्ट है कि इस बार ऋण विस्तार अधिक तेज रहा है।
जमा वृद्धि से आगे निकला ऋण
रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकों का ऋण वितरण जमा वृद्धि की तुलना में लगातार अधिक रहा है। दोनों के बीच का अंतर लगभग 260 आधार अंक तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंक अधिक तेजी से ऋण दे रहे हैं, जबकि जमा की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। ऋण-जमा अनुपात (सीडी अनुपात) 31 मार्च 2026 को समाप्त पखवाड़े में 81.4 प्रतिशत पर बना रहा। हालांकि यह पहले के उच्चतम स्तर 83 प्रतिशत से थोड़ा कम हुआ है, फिर भी यह ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर ही है। उच्च सीडी अनुपात यह दर्शाता है कि बैंक अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा ऋण देने में उपयोग कर रहे हैं।
वित्त वर्ष के अंत में ऋण वितरण में तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, ऋण में क्रमिक आधार पर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये यानी 2.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि आमतौर पर वित्त वर्ष के अंत में देखी जाने वाली तेजी को दर्शाती है, जब कंपनियां और व्यक्ति अधिक ऋण लेते हैं। ऋण वृद्धि को खुदरा क्षेत्र में लगातार मांग से समर्थन मिला है, खासकर सोना और वाहन ऋण में। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में भी मजबूती रही। बैंकों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी अधिक ऋण दिया, जबकि कंपनियों ने भी अनुकूल परिस्थितियों में बैंक ऋण को प्राथमिकता दी।
जमा में भी मजबूत वृद्धि
बैंकों की कुल जमा राशि बढ़कर 262.3 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं, क्रमिक आधार पर जमा में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे वित्त वर्ष के अंत में सामान्य रूप से बढ़ने वाली नकदी प्रवाह और मौसमी कारकों का समर्थन मिला। कुल जमा में समय जमा की हिस्सेदारी 85.9 प्रतिशत रही, जो बढ़कर 225.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें सालाना आधार पर 10.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की 10.5 प्रतिशत वृद्धि से थोड़ी अधिक है। मांग जमा में भी तेज वृद्धि देखी गई, जो 32.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह केवल 6.8 प्रतिशत थी।
कुल परिसंपत्तियों के मुकाबले ऋण अनुपात
मार्च के अंत तक कुल परिसंपत्तियों के मुकाबले ऋण का अनुपात 73.9 प्रतिशत रहा, जो पिछले पखवाड़े की तुलना में लगभग 30 आधार अंक कम है। यह संकेत देता है कि परिसंपत्तियों की तुलना में ऋण वृद्धि में हल्की नरमी आई है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में बैंक ऋण लगभग 13 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र की मजबूत मांग के कारण होगी। साथ ही, कंपनियां बांड जारी करने के बजाय बैंक ऋण को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो को और समर्थन मिलेगा।

