अहमदाबाद,
अडानी पावर लिमिटेड ने मंगलवार को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के गठन की घोषणा की। कंपनी ने यह कदम देश में स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते महत्व और दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उठाया है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने एक नई सहायक इकाई रावतभाटा-राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड का गठन किया है। यह नई इकाई 20 April 2026 को भारत में स्थापित की गई। कंपनी ने बताया कि इस नई इकाई की अधिकृत पूंजी 5 लाख रुपये रखी गई है, जिसे 10 रुपये के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है। यह पूरी तरह से अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के स्वामित्व में है, जबकि अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड स्वयं अडानी पावर लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इस प्रकार यह नई कंपनी समूह की संरचना में एक चरण नीचे की सहायक इकाई बनती है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि रावतभाटा-राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अडानी पावर लिमिटेड के पास है। इसी दिन समूह की एक अन्य इकाई अडानी एनर्जी ने भी एक नई सहायक कंपनी कोस्टल-महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड का गठन किया। यह कंपनी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कार्य करेगी और परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन, प्रसारण और वितरण का कार्य संभालेगी। कंपनी के अनुसार, इस नई इकाई का मुख्य उद्देश्य परमाणु ऊर्जा से प्राप्त बिजली का उत्पादन, उसका प्रसारण और वितरण करना है। यह कदम अडानी समूह की परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के लगातार निवेश यह संकेत देते हैं कि निजी क्षेत्र अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वर्तमान में भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.7 गीगावाट है। देश ने वर्ष 2047 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दिशा में बड़े उद्योग समूहों की भागीदारी इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

