देश में मानसून की बारिश में पिछले सप्ताह की तुलना में कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है। इसके बावजूद खाद्य महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अभी तक बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला है, हालांकि लगातार कम बारिश आने वाले सप्ताहों में चिंता बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, साप्ताहिक खुदरा कीमतों में सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत, अनाज में 0.5 प्रतिशत और खाद्य तेल एवं वसा की कीमतों में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वार्षिक आधार पर खाद्य तेल एवं वसा की कीमतों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा अंडों की कीमतों में 6 प्रतिशत, सब्जियों में 3 प्रतिशत, दूध में 3 प्रतिशत, मसालों में 3 प्रतिशत, अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य उत्पादन वाले राज्यों में बारिश की कमी लगातार बनी रहती है, तो आने वाले सप्ताहों में खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट के मुताबिक 3 जुलाई तक देश में कुल वर्षा सामान्य दीर्घकालिक औसत की तुलना में 31 प्रतिशत कम दर्ज की गई। वहीं जून का महीना सामान्य औसत से 40 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ, जो पिछले एक दशक का सबसे कमजोर जून साबित हुआ है। कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। इसके साथ ही देश के जलाशयों में जल भंडारण का स्तर भी गंभीर रूप से कम बना हुआ है। पूरे देश के जलाशयों में जल भंडारण उनकी कुल क्षमता का केवल 26 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।
क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें तो मध्य भारत में जलाशयों का भंडारण सबसे अधिक 32 प्रतिशत है। इसके बाद उत्तर भारत में 29 प्रतिशत और पश्चिम भारत में 28 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है। वहीं दक्षिण भारत में यह केवल 20 प्रतिशत और पूर्वी भारत में 19 प्रतिशत है, जिससे इन क्षेत्रों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि India Meteorological Department के अनुमान के अनुसार जुलाई2026 में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इससे मानसून की स्थिति और खरीफ बुवाई को लेकर चिंताएं फिलहाल बनी रहने की आशंका है।

