असम सरकार ने ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने घोषणा की है कि अब पात्र ग्रामीण युवा अपनी कृषि भूमि पर छोटे उद्योग और खादी इकाइयाँ स्थापित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की पूर्व अनुमति लेने के लिए जिला प्रशासन के पास जाने के लिए बाध्य नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि अधिक से अधिक युवा स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हों। उनका कहना है कि Ease Of Doing Business का उद्देश्य लोगों के लिए अपने उद्यम स्थापित करने की राह को आसान बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण उद्यमियों को अब अपनी कृषि भूमि पर छोटे औद्योगिक या खादी उत्पादन केंद्र स्थापित करने के लिए भूमि परिवर्तन की अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार ने ऐसे पात्र उद्योगों के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को स्वतः लागू कर दिया है, जिससे पहले होने वाली प्रशासनिक देरी समाप्त होने की उम्मीद है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना तेज होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। इससे युवा केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय छोटे उद्योगों और स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ सकेंगे।
यह निर्णय राज्य सरकार की विभिन्न उद्यमिता और स्वरोजगार योजनाओं के लाभार्थियों के लिए भी राहत लेकर आएगा। अब वे अपनी स्वयं की कृषि भूमि पर उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक तेजी से पूरा कर सकेंगे। सरकार का विश्वास है कि इस सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, गाँव आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी और कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण तथा विनिर्माण बढ़ेगा। इससे कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन भी होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
यह पहल राज्य में निवेश का बेहतर वातावरण तैयार करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में असम सरकार ने सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, उद्योगों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को कम करना निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नई व्यवस्था विशेष रूप से उन प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, जो अपने ही गाँव में छोटा उद्योग स्थापित करना चाहते हैं और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से बचना चाहते हैं।

