Sunday, July 12, 2026 |
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भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की तैयारी, 1.2 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश का प्रस्ताव

by Business Remedies
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Diagram showing the growth of the semiconductor industry in India

New Delhi,

केंद्र सरकार देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस नए चरण के तहत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से लेकर 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश प्रस्तावित किया गया है। संभावना है कि यह योजना मई तक लागू की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न मंत्रालयों के बीच इस योजना को लेकर विचार-विमर्श जारी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यह प्रस्ताव पहले चरण की तुलना में काफी बड़ा है, जिसमें 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

दायरा बढ़ाकर पूरे उद्योग को मिलेगा समर्थन

मिशन 2.0 के तहत सरकार केवल चिप निर्माण और डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उपकरण, कच्चे माल और अन्य आवश्यक घटकों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही देश में बौद्धिक संपदा क्षमता विकसित करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में बाधाओं और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। नई योजना में गैस आपूर्तिकर्ता, विशेष रसायन बनाने वाली कंपनियां, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग तथा अन्य सहयोगी इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इससे पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

डिजाइन प्रोत्साहन योजना में बदलाव

मिशन के दूसरे चरण में डिजाइन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को भी नया रूप दिया जाएगा। इसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर देश में अनुसंधान और विकास करने की अनुमति मिल सकती है। इससे तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले वर्षों में करीब 50 डिजाइन आधारित कंपनियों के उभरने की संभावना है। पहले चरण के तहत देश के छह राज्यों में लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की लागत से 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग से जुड़े संयंत्र शामिल हैं, जिससे देश में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास हो रहा है।

2030 तक मांग में तेजी की संभावना

मार्च 2025 में आयोजित नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि वर्ष 2030 तक भारत में सेमीकंडक्टर की मांग 110 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। मिशन 2.0 के जरिए देश अपनी जरूरत का लगभग 75 प्रतिशत उत्पादन खुद करने की क्षमता विकसित कर सकता है। सरकार का लक्ष्य 3 नैनोमीटर और 2 नैनोमीटर जैसी उन्नत तकनीकों पर काम करना है। इसके माध्यम से वर्ष 2035 तक भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करने की योजना है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का बड़ा कदम

अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी सेमीकंडक्टर उत्पादन को अपने यहां बढ़ाने में जुटे हैं। ऐसे में भारत का यह कदम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में इस योजना की घोषणा की थी और प्रारंभिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। उन्होंने बताया था कि इस योजना में लक्ष्य से दोगुना निवेश का भरोसा पहले ही मिल चुका है, जिसके चलते इसे बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।



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