बिजनेस रेमेडीज/जयपुर।कुंजेश कुमार पतसारिया | मन में कुछ अलग करने का जुनून लेकर काम किया जाए तो निश्चित रूप से उसमें सफलता जरूर मिलती है। ऐसा ही कर दिखाया है फेबिक्लोर के सीईओ और सह-संस्थापक विजय शर्मा ने। एक-दो कंपनियों में व्यवसाय का अनुभव लेकर इन्होंने वर्ष, २०१६ में अपनी स्वयं की कंपनी फेबिक्लोर लॉन्च की। लॉन्चिग के कुछ समय बाद ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री में डिजिटल करने की दिशा में पहली कंपनी बनकर उपभोक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान कायम की। वर्तमान में यह फिजिटल कंपनी है- यानी डिजिटल और फिजिकल दोनों में काम कर रही है। वहीं वर्ष, 2023 में जयपुर में भारत का पहला एक्सपीरियंस स्टूडियो लॉन्च कर हर किसी से सराहना पाई।
आपकी शैक्षणिक गतिविधियों को बताएं। कहां से शिक्षा ग्रहण की और कहां तक की है?
मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और उसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद 13 साल अबूधाबी में काम करने के दौरान मेरा रुझान कुछ अपना शुरू करने का हुआ।
व्यवसाय करने की प्रेरणा कहां से मिली? इसका अनुभव कहां से लिया और व्यवसाय में किस तरीके की सेवाएं देते हैं? कहां-कहां शोरूम है।

कॉलेज की पढ़ाई करने के तुरंत बाद मैं अबूधाबी चला गया और वहां लगभग 13 साल काम किया। मन तो हमेशा था कि भारत वापस आकर अपना बिजनेस शुरू करूं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा था। फिर एक दिन एक ऐसा मोड़ आया जिसने जिंदगी बदल दी। मैं और मेरी पत्नी अबू धाबी में फिल्म स्वदेश देखने गए थे। फिल्म खत्म होते-होते मुझे लगा-“अब बहुत हो गया, मुझे अपने देश में लौटकर कुछ करना है।” भारत लौटने के बाद मैंने दिल्ली में रुह्वद्वद्बठ्ठशह्वह्य कंपनी जॉइन की और वहीं से मैंने अपना बिजनेस प्लान बनाना शुरू किया। वर्ष, 2010 में मैंने अपनी इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनी शुरू की-जो एमईपी (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग) और ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री में काम करती थी। यह कंपनी मैंने करीब 6 साल चलाई और फिर वर्ष, 2016 में फैब्रिक्लोर की नींव रखी। शुरुआत में फैब्रिक्लोर एक बी२सी कंंपनी थी। हमारी भारत की पहली कंपनी थी, जिसने टेक्सटाइल इंडस्ट्री को डिजिटल करने की दिशा में कदम रखा। हमने भारत के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक टेक्नीक से बने फैब्रिक्स को एक ही जगह लाकर कंज्यूमर तक पहुंचाना शुरू किया। 14 राज्यों में 1000 से ज्यादा कारीगरों के साथ काम किया और यहीं से असली अनुभव मिला। कारीगरों के साथ छोटे-छोटे प्रोडक्शन करते हुए हमें समझ आया कि यही छोटी प्रोडक्शन क्षमता हम बी२बी मॉडल में बहुत बड़े स्केल पर इस्तेमाल कर सकते हैं। वर्ष, 2020 में हमें पहली फंडिंग मिली, शार्क टैंक में भी हिस्सा लिया और वर्ष,2023 में हमने आधिकारिक तौर पर बी२बी मॉडल में पिवट किया।
आज हम “फिजिटल” कंपनी हैं- यानी डिजिटल और फिजिकल दोनों। शुरुआत से ही हमारा डीएनए टेक-इनेबल्ड रहा है। इसलिए भले ही हम फैब्रिक सोर्सिंग करते हैं लेकिन हमारा लगभग सारा लीड जेनरेशन डिजिटल है। वर्ष, 2023 में हमने भारत का पहला एक्सपीरियंस स्टूडियो लॉन्च किया। जहां लोग हमारे रंगने योग्य (स्र4द्गड्डड्ढद्यद्ग) स्वैचेज और यार्डेज खरीद सकते हैं। स्र4द्गस्र फैब्रिक्स को टच और फील कर सकते हैं। अभी यह स्टूडियो जयपुर में है लेकिन सितंबर में हम दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में भी ऐसे दो स्टूडियो खोलने जा रहे हैं। ये फैशन लेबल्स को बहुत जल्दी फैब्रिक डिस्कवर करने और तुरंत ऑर्डर प्लेस करने का मौका देंगे।
वर्तमान में प्रतिस्पर्धा के युग में आपके समक्ष कोई चुनौतियां सामने आई, अगर आई तो उसका समाधान किस तरह से किया?
जब हमने बी२सी मॉडल से शुरुआत की तो सबसे बड़ी चुनौती थी-सप्लाई चेन की असंगठित प्रकृति और समय पर डिलीवरी। एक छोटी-सी गलती पूरी डिलीवरी को प्रभावित कर देती थी। लेकिन धीरे-धीरे हमने अपनी पूरी सिस्टम को टेक्नोलॉजी से जोड़ दिया। बी२बी में पिवट करने के बाद हमने कई इन-हाउस सिस्टम्स बनाए। जैसे-हमने अपना खुद का ईआरपी सिस्टम डेवलप किया ताकि हर ऑर्डर पर रियल टाइम कंट्रोल हो। हमने कस्टमर रिस्पॉन्स सिस्टम बनाया, जिससे कस्टमर को तुरंत जवाब मिले। इसके अलावा जब हम इंडस्ट्री से नए लोग हायर करते हैं, तो उन्हें टेक्सटाइल की बारीकियों को समझाने के लिए अपना ट्रेनिंग मॉडल भी तैयार किया है। साथ ही हमने अपने पार्टनर्स को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ा ताकि बैकएंड में प्रोडक्शन पर सबसे अच्छा कंट्रोल रहे। इन सबने हमें क्वालिटी और टाइमलाइन दोनों में मजबूत बनाया और यही हमारी सबसे बड़ी बढ़त बनी।
सामाजिक सरोकार के कोई कार्य किए हो तो बताएं?
बी२सी मॉडल में 7 साल तक हमने देशभर के कारीगरों और महिला समूहों के साथ मिलकर काम किया। 1000+ से ज्यादा कारीगरों को रोजगार दिया और उनकी कला को देश-दुनिया तक पहुंचाया। बी२बी में आने के बाद अब हम देशभर की मिल्स के साथ काम करते हैं, जहां सीधे तौर श्रमिकों को रोजगार मिलता है। इसके अलावा हम फैब्रिकलोर लॉन्चपैड चलाते हैं-यह फैशन डिजाइन के छात्रों के लिए एक प्लेटफॉर्म है, जहां उन्हें इंडस्ट्री एक्सपोजर, स्किल ट्रेनिंग और अपनी कला दिखाने का मौका मिलता है।
आपके आदर्श कौन हैं?
मुझे रतन टाटा जी बहुत प्रेरित करते हैं, क्योंकि उन्होंने दिखाया कि व्यवसाय केवल प्रॉफिट के लिए नहीं, समाज के लिए भी होना चाहिए। सत्य नडेला जी इस बात के उदाहरण हैं कि टेक्नोलॉजी के सही इस्तेमाल से किसी भी संस्था को वैश्विक ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
भविष्य में व्यवसाय को कहां तक विस्तार देना चाहते हैं?
हमारा लक्ष्य है कि फैब्रिक्लोर को एशिया की सबसे भरोसेमंद फैब्रिक सोर्सिंग कंपनी बनाया जाए। अगले तीन साल में हम 10,000+ फैशन ब्रांड्स और डिजाइनर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोडऩा चाहते हैं।
नए युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे, जिससे वह अपने व्यवसाय को उत्तरोतर बढ़ा सकें। हमारा युवाओं से यही सुझाव है कि वह सबसे पहले असली समस्या को पहचाने, जिसे वे हल करना चाहते हैं। डिजिटल स्किल्स और टेक्नोलॉजी को सीखें ताकि व्यवसाय उत्तरोतर आगे बढ़ सके। छोटी शुरुआत करने में डरें नहीं, विजन बड़ा रखें। असफलता से घबराए नहीं, वही आपको सबसे ज्यादा सिखाएगी। सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं, ताकि आपके व्यवसाय को और गति मिल सके।
टेक्सटाइल स्टार्टअप्स के लिए और प्रोत्साहन योजनाएं आनी चाहिए। इंटरनेशनल बी२बी एक्सपोर्ट को आसान और डिजिटल फ्रेंडली बनाया जाए। सबसे जरूरी है कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री में स्टैंडर्डाइजेशन लाया जाए-डाई की क्वॉलिटी और फैब्रिक प्रोसेसिंग के लिए प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) हो। यह इंडस्ट्री प्रदूषण की दृष्टि से भी संवेदनशील है, इसलिए इसके लिए पारदर्शी और सख्त गाइडलाइन्स जरूरी हैं।

