Saturday, July 4, 2026 |
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भारत में परिधीय धमनी रोग की समय रहते पहचान जरूरी, हर मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती: डॉ. आदर्श काबरा

by Business Remedies
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जयपुर | चारू भाटिया | | भारत में मधुमेह, क्रॉनिक किडनी रोग, उच्च रक्तचाप और तंबाकू सेवन के बढ़ते मामलों के कारण वैस्कुलर (रक्त वाहिका) रोग एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। हालांकि मिनिमली इनवेसिव वैस्कुलर इंटरवेंशन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी कई मरीज तब तक उपचार नहीं कराते जब तक उनमें क्रिटिकल लिम्ब इस्कीमिया, गैंग्रीन या एन्यूरिज्म जैसी गंभीर और अपरिवर्तनीय जटिलताएं विकसित नहीं हो जातीं। लेजर एथेरेक्टॉमी, इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी और ड्रग-कोटेड डिवाइसेज जैसी नई तकनीकों के आने से वैस्कुलर सर्जरी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब जोर समय रहते बीमारी की पहचान, व्यक्तिगत उपचार योजना और अंगों को बचाने पर है।

बिजनेस रेमेडीज की संपादकीय टीम के साथ इस विशेष बातचीत में Apex Hospitals, Jaipur के वरिष्ठ वैस्कुलर सर्जन Dr. Adarsh Kabra ने वैस्कुलर देखभाल के बदलते परिदृश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ एंडोवैस्कुलर इंटरवेंशन और ओपन सर्जरी के बीच कैसे निर्णय लेते हैं, उच्च जोखिम वाले लोगों में परिधीय धमनी रोग (PAD) के बढ़ते बोझ, नई उपचार तकनीकों की संभावनाओं और सीमाओं पर चर्चा की तथा यह भी बताया कि भारत में बेहतर परिणामों के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना क्यों आवश्यक है।

प्रश्न: आप कैसे तय करते हैं कि किसी मरीज का एंडोवैस्कुलर उपचार किया जाए या ओपन सर्जरी?

उत्तर: एंडोवैस्कुलर उपचार और ओपन सर्जरी के बीच निर्णय किसी एक कारक पर आधारित नहीं होता। यह पूरी तरह मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति, वैस्कुलर रोग की गंभीरता, उसके स्थान और एंजियोग्राफी की रिपोर्ट पर निर्भर करता है। सर्जरी की सलाह देने से पहले हम यह जांचते हैं कि मरीज शारीरिक रूप से सर्जरी के लिए उपयुक्त है या नहीं। मधुमेह, किडनी रोग, हृदय रोग और अन्य पुरानी बीमारियां उपचार की योजना को काफी प्रभावित करती हैं। सामान्यत: अधिक गंभीर मामलों में ओपन सर्जरी की जाती है, जबकि जहां अच्छे परिणाम मिलने की संभावना होती है, वहां मिनिमली इनवेसिव एंडोवैस्कुलर प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है। हर मरीज के लिए अलग उपचार योजना बनाई जाती है।

प्रश्न: हृदय और वैस्कुलर स्वास्थ्य का आपस में कितना गहरा संबंध है?

उत्तर: हृदय और रक्तवाहिकाएं एक एकीकृत प्रणाली की तरह काम करती हैं। हृदय ऑक्सीजन युक्त रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है, जबकि धमनियां और शिराएं रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाती और वापस लाती हैं। इस प्रणाली के किसी भी हिस्से में समस्या आने पर दूसरे हिस्से पर भी उसका प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न: परिधीय धमनी रोग (PAD) के उपचार में नवीनतम प्रगति क्या हैं?

उत्तर: हाल के वर्षों में PAD के उपचार में काफी प्रगति हुई है। अब कई विशेष तकनीकों की मदद से धमनियों में रुकावट की अधिक सटीक पहचान और कम चीरे के साथ उपचार संभव हो गया है। महत्वपूर्ण नवाचारों में विशेष एथेरेक्टॉमी डिवाइस शामिल हैं, जो धमनियों में जमी प्लाक को हटाने के लिए बनाई गई हैं। लेजर तकनीक भी तेजी से उपयोगी साबित हो रही है।

नॉन-इनवेसिव लेजर आधारित जांच से रक्तप्रवाह का आकलन किया जाता है, जबकि लेजर एथेरेक्टॉमी कैथेटर नियंत्रित अल्ट्रावायलेट ऊर्जा की मदद से जटिल रुकावटों को सुरक्षित रूप से हटाते हैं। इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी भी एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी है जिनकी धमनियों में कैल्शियम का अत्यधिक जमाव होता है। यह तकनीक ध्वनि तरंगों की सहायता से कठोर कैल्शियम को तोड़ती है, जिससे रक्त प्रवाह बहाल करना आसान हो जाता है। ड्रग-कोटेड बैलून भी उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि ये सभी तकनीकें उपचार के परिणामों को बेहतर बनाती हैं, लेकिन इनकी लागत अधिक होने के कारण इन्हें केवल चयनित मरीजों में ही उपयोग किया जाता है। यह भी समझना जरूरी है कि वैस्कुलर रोग दीर्घकालिक बीमारियां हैं और अधिकांश मरीजों को जीवनभर दवाइयों तथा नियमित Follow-up की आवश्यकता होती है।

प्रश्न: मधुमेह और किडनी रोग के मरीजों में कौन-सी वैस्कुलर जटिलताएं अधिक देखने को मिलती हैं?

उत्तर: मधुमेह और क्रॉनिक किडनी रोग गंभीर वैस्कुलर जटिलताओं के सबसे बड़े जोखिम कारकों में शामिल हैं। किडनी रोग के मरीजों की धमनियों, विशेषकर घुटने के नीचे की धमनियों में कैल्शियम का अत्यधिक जमाव हो जाता है। इससे उपचार कठिन हो जाता है और रक्तप्रवाह कम होने, लंबे समय तक घाव बने रहने तथा गंभीर स्थिति में गैंग्रीन का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेह भी रक्त वाहिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है और यदि मरीज धूम्रपान करता है तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। तंबाकू का सीमित सेवन भी पेट की धमनियों से लेकर पैरों की धमनियों तक रुकावट को तेज कर सकता है। यदि ऐसे मरीजों में समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार न हो तो अंग खोने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

प्रश्न: वर्तमान में वैस्कुलर उपचार में रीजेनरेटिव मेडिसिन और Stem Cell Therapy की क्या भूमिका है?

उत्तर: फिलहाल वैस्कुलर सर्जरी में रीजेनरेटिव मेडिसिन और Stem Cell Therapy की भूमिका सीमित है। अधिकांश मरीजों के लिए धूम्रपान छोड़ना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करना ही बीमारी की प्रगति को धीमा करने और लंबे समय तक अच्छे परिणाम प्राप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

प्रश्न: Tier-2 और Tier-3 शहरों में वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कैसे किया जा सकता है?

उत्तर: भारत में वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। प्रशिक्षित वैस्कुलर सर्जनों की संख्या अभी भी सीमित है और विशेषज्ञ सेवाएं मुख्यत: बड़े शहरों तक ही केंद्रित हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना आवश्यक है। वहां कार्यरत डॉक्टरों को वैस्कुलर रोगों की समय रहते पहचान, प्रारंभिक उपचार और जरूरत पड़ने पर मरीज को विशेषज्ञ केंद्रों तक रेफर करने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। जनजागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बहुत से लोग परिधीय धमनी रोग के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और गंभीर जटिलताएं होने के बाद ही इलाज कराते हैं। यह भी याद रखना चाहिए कि PAD के हर मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। कई मामलों में जीवनशैली में बदलाव, नियमित व्यायाम और दवाइयों से बीमारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। पुनर्वास भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए, जिसमें मरीज के साथ-साथ परिवार की भी सक्रिय भूमिका हो।

प्रश्न: वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में Public-Private Partnership की क्या भूमिका हो सकती है?

उत्तर: Public-Private Partnership के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाओं, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपलब्धता बढ़ाकर वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को काफी मजबूत किया जा सकता है। हालांकि केवल बेहतर बुनियादी ढांचा ही पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित वैस्कुलर सर्जनों की कमी है। जब तक अधिक विशेषज्ञ तैयार नहीं होंगे, तब तक अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल भी सभी मरीजों को समुचित उपचार नहीं दे पाएंगे।

प्रश्न: वैस्कुलर सर्जरी की शिक्षा में आप क्या बदलाव देखना चाहते हैं?

उत्तर: मेरा मानना है कि सुधार की शुरुआत मेडिकल स्नातक स्तर से होनी चाहिए। मेडिकल छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से भी वैस्कुलर रोगों की बेहतर समझ दी जानी चाहिए। उन्हें विभिन्न प्रकार के वैस्कुलर मामलों का प्रबंधन करने और आधुनिक उपचार तकनीकों को सीखने का अवसर मिलना चाहिए। स्नातकोत्तर स्तर पर अधिक General Surgery Residents को वैस्कुलर सर्जरी में Super Specialization के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बढ़ते वैस्कुलर रोगों के बोझ को देखते हुए विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है।

प्रश्न: लोगों को वैस्कुलर रोगों की स्क्रीनिंग कब से शुरू करानी चाहिए?

उत्तर: स्क्रीनिंग की आवश्यकता व्यक्ति के जोखिम कारकों पर निर्भर करती है। स्वस्थ वयस्कों में, जिनमें कोई बड़ा जोखिम कारक नहीं है, लगभग 40 वर्ष की आयु से वैस्कुलर स्क्रीनिंग शुरू करानी चाहिए। वहीं मधुमेह के मरीजों को अधिक नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है क्योंकि उनमें PAD का खतरा अधिक रहता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार लगभग हर पांच वर्ष में या आवश्यकतानुसार जांच कराने से गंभीर जटिलताओं से पहले ही बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

प्रश्न: क्या आनुवंशिकता वैस्कुलर रोगों में बड़ी भूमिका निभाती है?

उत्तर: वैस्कुलर रोगों के केवल कुछ ही मामलों में आनुवंशिक कारण जिम्मेदार होते हैं। अधिकांश मामले जीवनशैली, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और धूम्रपान जैसी पुरानी बीमारियों से जुड़े होते हैं। Marfan Syndrome एक प्रमुख आनुवंशिक रोग है, जो शरीर के संयोजी ऊतकों को प्रभावित करता है। इस रोग से पीड़ित लोगों में धमनी एन्यूरिज्म और Aortic Dissection का खतरा अधिक होता है। इन मरीजों के लिए समय रहते पहचान और नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि उचित समय पर उपचार से जानलेवा जटिलताओं को रोका जा सकता है।

प्रश्न: वैस्कुलर उपचार को अक्सर महंगा क्यों माना जाता है?

उत्तर: वैस्कुलर उपचार की लागत प्रत्येक मरीज के अनुसार अलग-अलग होती है क्योंकि कोई एक समान उपचार योजना सभी पर लागू नहीं होती। उपचार का निर्णय एंजियोग्राफी की रिपोर्ट, बीमारी की गंभीरता, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं और आवश्यक प्रक्रिया के आधार पर लिया जाता है। सबसे बड़ी चुनौती मरीज के अंग को कटने से बचाना होती है। कई बार अंग बचाने के लिए जटिल प्रक्रियाएं, अनेक इंटरवेंशन और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिससे उपचार की लागत बढ़ जाती है। वैस्कुलर सर्जरी में उपयोग होने वाले विशेष Implant और तकनीकें महंगी होती हैं तथा लगातार हो रहे तकनीकी विकास के कारण भी स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ती है। हमारा उद्देश्य हमेशा मरीज को सबसे उपयुक्त उपचार उपलब्ध कराना होता है, साथ ही लागत को यथासंभव उचित बनाए रखना भी हमारी प्राथमिकता रहती है।

Dr. Adarsh Kabra का मानना है कि आधुनिक वैस्कुलर उपचार पहले की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हो चुके हैं, लेकिन समय रहते बीमारी की पहचान, स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान से दूरी, नियमित स्क्रीनिंग और सही समय पर विशेषज्ञ के पास Referral ही अंगों के नुकसान जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। उनका मानना है कि विशेषज्ञ प्रशिक्षण का विस्तार और आम लोगों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर जागरूकता बढ़ाना ही देशभर में बेहतर वैस्कुलर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की कुंजी है।



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