बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। वर्तमान समय में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं विशेष रूप से “कोचिंग क्लास” के विद्यार्थियों के मध्य ज्यादा देखी जा रही है। साथ ही देश के कई बुद्धिजीवियों, उद्योगपतियों, सेवा के जवानों और महिलाओं में भी आत्महत्या के आंकड़े .कम नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से अब समाज, देश व सामाजिक संगठनों के साथ धार्मिक संप्रदायों में काफी चिंताएं बढ़ती जा रही है। इसे रोके जाने के उपायों पर भी उपाय व सुझाव विकसित हो रहे हैं।
आत्महत्या के प्रमुख कारणों में “मानसिक विकार” है, इसके साथ जागरूकता की कमी, समाज का डर और पेशेवरों की कमी के कारण मानसिक विकार वाले 70 से 92 प्रतिशत लोगों का इलाज उपलब्ध नहीं है। वहीं दूसरी ओर बढ़ती निराशा, त्वरित व्यक्तिगत लक्ष्य प्राप्ति की होड़, अनुचित भौतिक इच्छाएं, मानसिक स्वास्थ्य की प्रतिकूलता से बढ़ता आर्थिक बोझ आदि शामिल है। इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति हर तरह उपायों से हार जाता हैं। तब वह आत्महत्या का कदम उठा लेता है। कोई भी व्यक्ति आरंभ में किसी परेशानी के कारण आत्महत्या के बारे में नहीं सोचता, लेकिन जब उसे लगता है, कि अब कोई उम्मीद,उपचार,समाधान,उपाय नहीं बचे है, तब वह आत्महत्या कर लेता है।
हर क्षेत्र में असफल होने और स्वास्थ्य के लगातार प्रतिकूल होने से व्यक्तिमानसिक रूप से टूट जाता है
डिप्रेशन या अवसादग्रस्त व्यक्ति ही आत्महत्या के बारे में सोचता है। डिप्रेशन से घिरे व्यक्ति के बारे में यह मान लिया जाता है कि उसका स्वभाव ही इस तरह का है, परंतु ऐसा नहीं है। मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि आमतौर पर भारतीय परिवेश में सगाई या शादी का टूटना, पत्नी या पति का किसी और से अफेयर होना, पत्नी का रूठ कर मायके चले जाना, ऑफिस, स्कूल या कोचिंग क्लास का तनाव होना, परीक्षा या इंटरव्यू में फेल होना, प्रेमी-प्रेमिका में झगड़ा होना, आर्थिक कठिनाई, माता-पिता की अधिक अपेक्षाएं, हर क्षेत्र में लगातार असफल होना एवं स्वास्थ्य के लगातार प्रतिकूल होने के साथ ही पारिवारिक कलह जैसी परिस्थितियों में व्यक्ति मानसिक रूप से टूट जाता है। इन परिस्थितियों में व्यक्तिआत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लेता हैं।
दुनिया में 79 फीसदी आत्महत्या निम्न और मध्यम वर्ग वाले करते हैं
सर्वे बताते हैं कि दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्तिआत्महत्या करता है, जिसमें बड़ी संख्या में आत्महत्या के मामले 20 से 34 वर्ष के युवाओं के सबसे ज्यादा है। डब्लूएचओ के अनुसार दुनिया में 79 फीसदी आत्महत्या निम्न और मध्यम वर्ग वाले लोग करते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में युवा वर्ग शामिल है, जिनके कंधों पर किसी भी देश का भविष्य टिका होता है। बीते वर्षों में दुनिया भर में आत्महत्या के आंकड़े काफी चिंताजनक रहे हैं। एक शोध के अनुसार देश के औसतन 1.5 लाख लोगों की मौत हर साल आत्महत्या की वजह से होती है। वर्ष, 2021 में देश में 1.64 लाख से अधिक लोगों ने आत्महत्या की यानी रोजाना 450 से अधिक लोगों की मौत आत्महत्या की वजह से हुई है। मनोचिकित्सकों के अनुसार जब कोई व्यक्ति या युवा गहरे मानसिक तनाव से जूझ रहा होता है तो उसके व्यवहार में पहले की अपेक्षा बदलाव देखने को मिलता है। साथ ही व्यक्ति बहुत ज्यादा या कम खाने लगता है, लोगों से मिलना जुलना टालता है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना या बात-बात पर भावुक होता है व अपनी प्रिय चीजों को भी दूसरों को देने लगता है। अब देश में पहली बार डिप्रेशन के मरीज की सर्जरी मुंबई में एक ऑस्ट्रेलियाई महिला की की गई। वर्ष,2017 में मेंटल हेल्थ एक्ट बनने के बाद यह पहली सर्जरी है।
आत्महत्या रोकथाम के लिए
पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति की घोषणा वर्ष, 2022 में हुई
अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के लोगों में आत्महत्या के विचार सबसे ज्यादा दिसंबर महीने में आते हैं, जिसमें तडके 4 से 6 बजे के बीच आत्महत्या करने की सबसे अधिक आशंका रहती है। ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती है, जिसका कोई समाधान ना हो। पारिवारिक तनाव, ऑफिस, कोचिंग क्लास आदि के तनाव तो प्रत्येक जगह होते हैं, परंतु उनसे घबराकर पलायन करने के बजाय उनका दृढ़ता से मुकाबला करना चाहिए। ऐसे अवसादग्रस्त लोगों की मदद करने के लिए कनाडा में एक कॉल सेंटर तेल-एईद मोंटरियल खोला गया है, जहां लोग फोन पर अपनी परेशानी या तनाव के बारे में बात कर सकते हैं। केंद्र द्वारा देशभर में आत्महत्या रोकथाम को लेकर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति की घोषणा 22 नवंबर, 2022 को की गई। इसमें 2030 तक आत्महत्या से मृत्यु दर में 10 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य है। इस योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर मनोचिकित्सक और मानसिक रोग विशेषज्ञों की कमी है। हमारे देश में प्रति एक लाख लोगों पर 0.75 मनोचिकित्सक हैं, जबकि डब्लूएचओ के अनुसार प्रति लाख पर कम से कम तीन मनोचिकित्सक की आवश्यकता होती है।
अमेरिका में भी आत्महत्या नहीं हो रही कम
अमेरिका में भी आत्महत्या कम नहीं हो रही है। अमेरिका में हर साल गन से 45000 से अधिक मौतों में आधी से ज्यादा मौतें गन से होती है। 10 से 17 साल के टीनएजरों ओर बच्चों में लगभग आधी आत्महत्याएं फायर आर्मस से होती रही हैं। कनाडा में इच्छा मृत्यु का प्रावधान चल रहा है, कनाडा बीमार व्यक्तियों के लिए डॉक्टर की सलाह से इच्छा मृत्यु का कानून, मानसिक रूप से बीमार लोगों पर लागू होने का प्रस्ताव-2024 में रखा गया। इच्छा मृत्यु से पहले बीमार व्यक्ति को दो डॉक्टर से आकलन करते एक डॉक्टर बीमारी का विशेषज्ञ होना आवश्यक है। योग्य करार दिए जाने के बाद बीमार व्यक्तिको 90 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। रिपोर्ट में 30 दिसंबर, 2023 तक लगभग 13200 कनाडाई डॉक्टरों की सहायता इच्छा मृत्यु की है।
आचार्य श्री विजयराज म.सा. के मार्गदर्शन में वर्ष, 2023 में आत्महत्या मुक्तिअभियान के तहत निकाली थी जनजागृति रैली
इसी तारतम्य में शांत क्रांति संघ के आचार्य 1008 श्री विजयराज जी गुरुदेव के फरमान, प्रेरणा और उनके मार्गदर्शन में 10 दिसंबर, 2023 को आत्महत्या मुक्ति अभियान के तहत जनजागृति रैली पूरे देश में निकाली। इस दौरान नागरिकों व बच्चों को किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या नहीं करने के लिए प्रेरित किया गया है। इस जन आंदोलन से भारत सहित दुनिया भर के लोगों में आत्महत्या के मामलों में कमी आई है। लेकिन फिर भी प्रति 43 सेकंड में एक व्यक्ति अपने जीवन लीला समाप्त कर रहा है। भारतवर्ष में आत्महत्या होने वाली मृत्यु दर में वर्ष, 1990 से 2021 के मध्य 31.5 फीसदी की कमी आई है। निश्चित तौर से जब संत महात्मा और अन्य लोग जागरूकता बनाएंगे, तो कमी आना स्वाभाविक है। श्री शांत क्रांति संघ के आचार्य का फरमान और पहल देश-विदेश हो आत्महत्या मुक्त देश शांत क्रांति संघ के सानिध्य में देश भर में बढ़ती आत्महत्या रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही समस्त संप्रदाय, समाज व जनहितैषी संस्थाओं को विशेष रूप से आत्महत्या निषेध संबंधी जन जागरूकता कार्यक्रम चला कर आत्महत्या मुक्तदेश होना चाहिए।
डॉ. बी. आर. नलवाया,
पूर्व प्राचार्य, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर

