उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और अधिकारों की जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष की भांति आज विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार प्रथाओं, शोषण और असुरक्षित उत्पादों के खिलाफ उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाता है। यह बाजार में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं को उनके हक चुनने का अधिकार, सूचित रहने का अधिकार और शिकायत निवारण का अधिकार के बारे में शिक्षित करता है। इस दिन कंज्यूमर्स इंटरनेशनल और अन्य संगठन 200 से अधिक देशों के साथ मिलकर उपभोक्ता संरक्षण के लिए कार्रवाई करते हैं। इस दिवस की शुरुआत 15 मार्च 1962 को अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की ओर से की गई थी। उसी दिन उन्होंने उपभोक्ताओं के अधिकारों पर एक ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं के चार बुनियादी अधिकारों उपभोक्ताओं को ऐसी वस्तुएं और सेवाएं मिलनी चाहिए जो सुरक्षित हों और उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न हों, उपभोक्ताओं को अपने द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए, उपभोक्ताओं को स्वतंत्र रूप से विभिन्न विकल्पों में से चयन करने का अधिकार होना चाहिए और उपभोक्ताओं को अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिनिधित्व प्राप्त करना चाहिए का उल्लेख किया था। इस वर्ष भी विशिष्ट थीम घोषित की गई है, जो उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ी किसी नई समस्या या आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस-2026 की थीम सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता तय की गई है, जिसका उद्देश्य स्थिरता का समर्थन करने वाली निष्पक्ष और जिम्मेदार उपभोक्ता प्रथाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। जहां एक ओर भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनकी खरीदारी से जुड़े धोखाधड़ी, अत्यधिक कीमतें और गलत जानकारी से बचाना है।

