तमिलनाडु का वस्त्र और परिधान क्षेत्र अब यूरोप और UK बाजारों में बड़े निर्यात विस्तार की तैयारी कर रहा है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले Free Trade Agreement के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और अमेरिका बाजार पर निर्भरता कम होगी।
उद्योग संगठनों के अनुसार यूरोपीय संघ और UK के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते भारत को वैश्विक वस्त्र निर्यात में मजबूत स्थिति दिला सकते हैं। इससे भारतीय उत्पादों को उन देशों के बराबर शुल्क लाभ मिलेगा, जो अभी वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में आगे हैं। निर्यातकों का कहना है कि यूरोप के खरीदार भारतीय कंपनियों के साथ लगातार संपर्क बढ़ा रहे हैं और धीरे-धीरे बांग्लादेश तथा वियतनाम जैसे देशों से खरीद कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। पिछले वर्ष अमेरिका बाजार में शुल्क संबंधी दबाव के कारण उद्योग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद कंपनियों ने जोखिम कम करने के लिए नए देशों में व्यापार विस्तार पर जोर देना शुरू किया है।
भारतीय निर्माता यूरोप में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चला रहे हैं। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी, विदेशी शोरूम का विस्तार और स्थानीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी तेजी से की जा रही है, ताकि ग्राहकों तक पहुंच बेहतर हो और खरीदारों के साथ लंबे समय के संबंध बनाए जा सकें। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप और UK के कई खरीदारों ने व्यापार समझौतों के आधिकारिक लागू होने से पहले ही भारतीय कंपनियों को परीक्षण ऑर्डर देना शुरू कर दिया है। कई निर्यातक भविष्य में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए नए विक्रेता नेटवर्क और उत्पादन साझेदारी का विस्तार कर रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक इन व्यापार समझौतों का सबसे बड़ा लाभ Financial Year 2027-28 से दिखाई देना शुरू हो सकता है। इस दौरान वस्त्र निर्यात आय में दो अंकों की मजबूत वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के वस्त्र क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से विनिर्माण, प्रसंस्करण और परिधान उत्पादन क्षेत्र में नई परियोजनाओं की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि उत्पादन क्षमता बढ़ाना अभी भी उद्योग के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। कुछ कंपनियां भारत में ही उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं, जबकि कई कंपनियां विदेशी कारखानों के साथ साझेदारी मॉडल पर काम कर रही हैं ताकि बिना बड़े पूंजी निवेश के भविष्य की मांग पूरी की जा सके। Financial Year2024-25 के दौरान भारत का यूरोपीय संघ और UK को वस्त्र निर्यात लगभग 10अरब डॉलर रहा। उद्योग अनुमान के अनुसार यदि Free Trade Agreement सफलतापूर्वक लागू होते हैं और वैश्विक खरीद पैटर्न भारत के पक्ष में बने रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ सकता है।

