नई दिल्ली,
पूर्वोत्तर क्षेत्र के 7 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से ₹.560 करोड़ का अस्थायी शुद्ध लाभ दर्ज किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने बताया कि बैंकों के प्रदर्शन में यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात घटकर 4.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में भी सुधार आया है।
पूर्वोत्तर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की समीक्षा बैठक त्रिपुरा के अगरतला में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पूर्वोत्तर के 7 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्ष, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी तथा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के प्रतिनिधि शामिल हुए। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में इन बैंकों की पहुंच और लोगों का विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सराहना करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों ने लाभ बढ़ाने, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों को कम करने और ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
बैठक में यह भी कहा गया कि आने वाले समय में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार और मजबूती सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए प्रायोजक बैंकों की भूमिका अहम रहेगी, जो तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने, प्रभावी रणनीतियां साझा करने और सूचना प्रौद्योगिकी संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पूर्वोत्तर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। वर्तमान में इनकी 887 से अधिक शाखाएं 7राज्यों के 105 जिलों में संचालित हो रही हैं। इनमें से 92 प्रतिशत से अधिक शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, जिससे दूरदराज के लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

