दुनिया के किसी भी देश की पहचान केवल उसकी आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, विरासत, प्राकृतिक संपदा और लोगों की जीवनशैली से भी होती है। पर्यटन ऐसा माध्यम है जो इन सभी पहलुओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। यह ना केवल विभिन्न देशों और समाजों को एक-दूसरे के करीब लाता है, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और सांस्कृतिक संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य को लेकर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाएगा। आज के दौर में पर्यटन वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। एक पर्यटक की यात्रा से होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यवसाय और सेवा क्षेत्र तक अनेक लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं। इसलिए पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार भी है। विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत वर्ष,1980 में हुई थी। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की ओर से की गई थी। हर वर्ष एक विशेष थीम के साथ यह दिवस मनाया जाता है, जिसमें पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की जाती है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक स्थानों, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव क्षेत्रों और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत मौजूद है। पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय समुदायों की आय बढ़ सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। पर्यटन से विभिन्न देशों के बीच की दूरियां कम होती हैं और अतिथि देवो भव जैसी भावना को वैश्विक विस्तार मिलता है। देश में पर्यटन की अपार संभावनाओं को भुनाने के लिए सरकार को कुछ ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए।

