सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया में काफी बदलाव देखने में आया है। दुनिया भर में सौर पैनलों को किसी भी अन्य पीढ़ी की तकनीक की तुलना में कहीं अधिक संख्या में स्थापित किया जा रहा है। आने वाले पांच से दस वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लागत और दक्षता में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। इससे व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियों के लिए निवेश करना आसान हो जाएगा और साथ ही वे ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे। भारत सरकार ने वर्ष, 2022 तक 20 गीगावाट का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह लक्ष्य निर्धारित समय से चार साल पहले ही हासिल कर लिया गया। सौर पैनलों की दक्षता में सुधार और लागत में कमी आने से यह सफल प्रतीत हो रही है। जहां भारत को दुनिया के देशों में सौर ऊर्जा उत्पादन में सबसे कम लागत वाला देश माना जाता है। सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत वर्ष, 2030 तक मौजूदा 2 रुपए प्रति किलोवाट घंटे से घटकर 1.9 रुपये प्रति किलोवाट-घंटे तक पहुंचने की उम्मीद है, यानी लगभग 70 फीसदी की गिरावट आएगी। यह नई तकनीकों के विकास के कारण संभव होगा, जिससे सौर पैनल किफायती और अधिक कुशल बन गए हैं। हालांकि सौर पैनलों की अवधारणा बहुत लंबे समय से है, पर हाल के समय में ये लोकप्रिय हो रही हैं। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का भविष्य बदलता जा रहा है, वैसे-वैसे कई निर्माता हाल ही में 30 फीसदी दक्षता स्तर वाले सौर पैनलों का उत्पादन करने में सक्षम हुए हैं।

