Thursday, February 19, 2026 |
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पेरम्बलूर में छोटी प्याज की भरपूर पैदावार से कीमतें गिरीं

किसान बोले सरकार करे हस्तक्षेप

by Business Remedies
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Farmers sorting shallots in Perambalur amid sharp price fall

चेन्नई,

तमिलनाडु के पेरम्बलूर जिले में इस सीजन छोटी प्याज की अधिक पैदावार के कारण कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में किसानों को मात्र Rs.10 प्रति किलोग्राम तक का भाव मिल रहा है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्हें Rs.30 से Rs.40 प्रति किलोग्राम तक कीमत प्राप्त हुई थी। कीमतों में इस तेज गिरावट से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं और उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन और मांग के बीच असंतुलन की स्थिति बन गई है। बाजार में आपूर्ति अधिक होने के कारण व्यापारियों द्वारा बेहद कम दरों पर खरीद की जा रही है। ऐसे में किसानों के पास या तो कम दाम पर उपज बेचने का विकल्प है या फिर भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में भंडारण करने का रास्ता।

पेरम्बलूर जिले के कुछ हिस्सों में उगाई जाने वाली चेत्तिकुलम छोटी प्याज को पिछले वर्ष ही Geographical Indication टैग मिला था। किसानों को उम्मीद थी कि इससे उन्हें बेहतर मूल्य और संस्थागत समर्थन मिलेगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि GI टैग मिलने के बावजूद उन्हें बाजार में कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। जिले में छोटी प्याज की खेती वर्ष में तीन चक्रों में की जाती है। मौजूदा चक्र की शुरुआत पिछले वर्ष सितंबर में हुई थी। इस बार लगभग 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की गई। वर्तमान में फसल कटाई अपने चरम पर है और किसानों के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 100 बोरी उत्पादन हुआ है, जिसमें प्रत्येक बोरी का वजन करीब 50 किलोग्राम है। पिछले वर्ष लगभग 4500 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई थी और औसतन प्रति एकड़ 60 बोरी उत्पादन मिला था। इस प्रकार इस वर्ष उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सामान्य परिस्थितियों में अधिक उत्पादन को सकारात्मक माना जाता है, लेकिन इस बार यही अधिकता बाजार में गिरावट का कारण बन गई है। व्यापारियों द्वारा गुणवत्ता के आधार पर Rs.10 से Rs.28 प्रति किलोग्राम तक खरीद मूल्य तय किया जा रहा है, जो किसानों की लागत से काफी कम है। करैयूर गांव के किसान आर. कार्तिक ने कहा कि हर सीजन में कीमतों में बदलाव होता है, लेकिन किसानों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस विपणन व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि व्यापारी उनसे कम कीमत पर प्याज खरीदकर बाजार में Rs.50 से Rs.60 प्रति किलोग्राम तक बेच रहे हैं। उनका कहना है कि GI टैग से जीवन स्तर सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन अब निराशा हाथ लगी है।

सिरुवाचुर के किसान एम. सेंथिल ने बताया कि उन्होंने प्रति एकड़ लगभग Rs.60000 से Rs.70000 तक खर्च किया है। वर्तमान कीमतों पर बिक्री करने से लागत भी नहीं निकल पाएगी। मजबूरी में उन्हें तीन महीने तक प्याज भंडारण करना पड़ सकता है, ताकि भविष्य में बेहतर भाव मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर सरकारी सहायता नहीं मिली तो कई किसान छोटी प्याज की खेती छोड़ सकते हैं। किसानों ने मांग की है कि सरकार सीधे खरीद की व्यवस्था करे, बिचौलियों को हटाए, अन्य जिलों के व्यापारियों को आमंत्रित करे तथा भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधाएं स्थापित करे। इस मामले पर जिला कलेक्टर एन. मिरुनालिनी ने कहा कि प्रशासन कृषि और विपणन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर उचित कदम उठाने की योजना बना रहा है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।



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