Wednesday, July 8, 2026 |
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सेबी ने जीनस पावर के खिलाफ न्याय निर्णयन कार्यवाही बिना किसी मौद्रिक दंड लगाए निपटा दी

by Business Remedies
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धैर्यवर्धन सिंह राजावत  | जयपुर। 22 अप्रैल, 2024 के एससीएन नोटिस द्वारा जयपुर आधारित स्मार्ट मीटर बनाने वाली प्रमुख कंपनी जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड पर पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी ने सेबी अधिनियम, 1992 की धारा 15-आई के तहत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सूचीबद्धता दायित्व और प्रकटीकरण आवश्यकताएं) विनियम, 2015 के विनियमन 4 (1) (सी) और 4 (1) (डी) के कथित उल्लंघन के लिए न्यायनिर्णयन कार्यवाही शुरू की है।

गौरतलब है कि 3.1.31 अगस्त, 2023 को 17:59:29 बजे, जीनस ने रुह्रष्ठक्र विनियमन, 2015 के विनियमन 30 के अनुसार स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि ‘जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ की एक स्टेप-डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी को 2,247.37 करोड़ रुपए (करों के बाद शुद्ध) का लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) मिला है। इसके बाद, सेबी ने आगे की जांच की, जिसके दौरान नोटिसकर्ता को कथित तौर पर रुह्रष्ठक्र विनियमन, 2015 के विनियमन 4 (1) (सी) और 4 (1) (डी) का उल्लंघन करते हुए पाया गया।
यह देखा गया कि 31 अगस्त, 2023 को कंपनी द्वारा की गई घोषणा के समय, प्रदान किए गए एएमआईएसपी अनुबंध की शर्तों और नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया गया था, इसलिए उक्त जानकारी 31 अगस्त, 2023 को की गई घोषणा का हिस्सा नहीं थी। हालांकि, बाद में, कंपनी ने 14 नवंबर, 2023 को उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिससे 13 फरवरी, 2023 से 111 महीनों में अनुबंध की अवधि का प्रसार हुआ। हालांकि, एक्सचेंज (एनएसई और बीएसई) की वेबसाइट से यह देखा गया है कि कंपनी ने 14 नवंबर, 2023 को या उसके बाद इस जानकारी का खुलासा नहीं किया था।

उपरोक्त के संबंध में, यह कहा जा सकता है कि एक कंपनी के लिए, जिसका परिचालन से समेकित वार्षिक राजस्व लगभग 685 करोड़ (वित्त वर्ष 2022 को समाप्त) से 808 करोड़ (वित्त वर्ष 2023 को समाप्त) और समेकित शुद्ध लाभ 25 करोड़ (वित्त वर्ष 2022 को समाप्त) से 34 करोड़ (वित्त वर्ष 2023 को समाप्त) था, 2,247 करोड़ रुपए का एलओए प्राप्त करना निवेशकों के लिए निवेश निर्णय लेने के लिए भ्रामक जानकारी हो सकती है, क्योंकि इस जानकारी के अभाव में कि इस तरह के आदेश से राजस्व कंपनी के खातों की पुस्तकों में तुरंत नहीं बल्कि 8-10 वर्षों की अवधि के भीतर दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त, जब कंपनी को अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बाद एलओए से राजस्व सृजन की अवधि के बारे में पता था, तो उसने इस पर जनता के सामने कोई खुलासा नहीं किया।
सेबी के एडजुडिकेटिंग अधिकारी ने पाया कि उपर्युक्त महत्वपूर्ण सूचनाएं आसानी से सुलभ हैं और इन्हें सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध दस्तावेजों से प्राप्त किया जा सकता है, विशेष रूप से सरकारी वेबसाइट पर और आरईसी और एनएसजीएम द्वारा प्रकाशित एसबीडी को कवर करने वाले विभिन्न लेखों में विस्तृत विश्लेषण में। नतीजतन, यह माना जा सकता है कि यह जानकारी ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।’ इसके अतिरिक्त, 31 अगस्त, 2023 के प्रकटीकरण में, यह भी स्पष्ट किया गया था कि ‘हमारी कुल ऑर्डर बुक अब लगभग 11,000 करोड़ रुपये (करों के बाद) है।’ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ‘ऑर्डर बुक’ शब्द कंपनी द्वारा सुरक्षित किए गए अनुबंधों के कुल मूल्य को संदर्भित करता है, जिसमें कंपनी के वार्षिक राजस्व के संकेत के बजाय समय अवधि में निष्पादित की जाने वाली परियोजनाओं से भविष्य के राजस्व शामिल हैं। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऑर्डर बुक प्रगति पर या शुरू की जाने वाली परियोजनाओं से प्रत्याशित राजस्व धारा का प्रतिनिधित्व करती है, जो कंपनी की व्यावसायिक गतिविधि और संभावित भविष्य की कमाई के उपाय के रूप में कार्य करती है। इसलिए, वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए कंपनी के वार्षिक राजस्व को दर्शाने के रूप में कुल ऑर्डर बुक की व्याख्या करना विवेकपूर्ण नहीं होगा।

नोटिस के अनुसार सेबी ने बताया कि ‘…हमने पाया है कि कई कंपनियों ने इन मामलों के संबंध में समान प्रकटीकरण प्रथाओं को अपनाया है। किसी भी शेयरधारक ने इस मामले में स्कोर्स पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज नहीं की या सीधे अनुपालन अधिकारी को ईमेल नहीं किया। यह उचित है कि यदि कंपनी ने शेयरधारकों या हितधारकों को कोई नुकसान या हानि पहुंचाई होती, तो तदनुसार शिकायत दर्ज की जाती…।’

इस संबंध में, कंपनी ने एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पावर लिमिटेड (एचपीएल), रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड, प्रवेग कम्युनिकेशंस (इंडिया) लिमिटेड और ज्यूपिटर वैगन्स लिमिटेड के उदाहरणों का हवाला दिया है। वहीं ऑर्डर की समय अवधि के बारे में कंपनी के उपाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने अर्निंग कॉल के समय निवेशकों को पूछे गए सवाल के उत्तर में स्पष्ट रूप से बताया था।

इसके मद्देनजर, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और नोटिस प्राप्तकर्ता के प्रस्तुतिकरण को ध्यान में रखते हुए, सेबी के एडजुडिकेटिंग अधिकारी ने इस संबंध में नोटिस प्राप्तकर्ता जीनस पावर को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि नोटिस प्राप्तकर्ता के संबंध में कथित उल्लंघन स्थापित नहीं होता है। उन्होंने ऑर्डर में कहा कि चूंकि नोटिस प्राप्तकर्ता के संबंध में कथित उल्लंघन स्थापित नहीं हुआ है, इसलिए मुझे लगता है कि मुद्दा संख्या सैकंड और मुद्दा संख्या थर्ड पर आगे विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

तदनुसार, सेबी के एडजुडिकेटिंग अधिकारी ने उपरोक्त निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए निर्णय दियाा कि सेबी अधिनियम की धारा 15-आई के तहत प्रदत्त शक्तियों के साथ-साथ न्यायनिर्णयन नियमों के नियम 5 के तहत, 22 अप्रैल, 2024 के एससीएन द्वारा शुरू की गई नोटिस के खिलाफ न्यायनिर्णयन कार्रवाई बिना किसी मौद्रिक दंड लगाए निपटा दी जाती है।



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