Saturday, March 7, 2026 |
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‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भू-स्थानिक तकनीक भौगोलिक संतुलन बनाने में सहायक’

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर।  S.S. Jain Subodh स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं राजस्थान भूगोल परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विकसित भारत /2047 जिओस्पेस्यिल टेकनोलॉजी एण्ड इमिर्जिंग ट्रेंड्स इन ज्योग्राफी फॉर ए स्स्टेनेबल फ्यूचर: ए मल्टीडिसीप्लीनेरी एप्रोच‘ के दूसरे दिन मंगलवार को विभिन्न ज्वलन्त, महत्वपूर्ण एवं समाजोपयोगी विषयों पर आठ तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ। जिओस्पेस्यिल तकनीक और स्मार्ट सिटी, आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, डिजीटल इण्डिया और जिओस्पेस्यिल गवर्नेन्स, कृषि और ग्रामीण विकास, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में जियोस्पेस्यिल तकनीक, यातायात और संचार नेटवर्क, ऊर्जा संक्रमण काल और स्थिरता जैसे प्रमुख
विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ।
संगोष्ठी में भू-स्थानिक तकनीक को जलवायु परिवर्तन तथा भौगोलिक संतुलन बनाने की भूमिका को प्रासंगिक माना तथा बताया कि इस तकनीक से भौगोलिक असंतुलन के साथ साथ प्रदूषण जैसी ज्वलन्त समस्याओं का आसानी से निपटाया जा सकता है।
जिओस्पेस्यिल तकनीक और स्मार्ट सिटी एवं प्राकृृृतिक संसाधन प्रबंधन तकनीक सत्रों की अध्यक्षता करते हुये प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं भूगोलविद प्रो. मनोज कुमार पंडित ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समसामयिक जलवायु परिवर्तन के कारणों का अध्ययन करते हुए अपना शोधकार्य करना चाहिए, जिससे इस जलवायु परिवर्तन के संबंध में नई जानकारी प्राप्त हो सके। गौरतलब है कि प्रो. मनोज कुमार पंडित राजस्थान के एकमात्र भूगोलविद एवं भूगर्भशास्त्री है, जिन्होंने अण्टार्टिका क्षेत्र में रहकर बहुत ही जटिल शोधकार्यों को अंजाम दिया है। डिजीटल इण्डिया और जिओस्पेस्यिल गवर्नेन्स, तकनीकी सत्र में प्रो. बी.एल. तैली की अध्यक्षता में प्रो. आर. एन. मिश्रा एवं प्रो. मनोज कुमार पंडित ने यंग ज्योग्राफरर्स के सत्रों का मूल्यांकन किया। इस सत्र में 26 से अधिक यंग ज्योग्राफर्स ने भाग लिया, जिसका परिणाम समापन सत्र में घोषित किया जायेगा। द्वितीय दिन 8 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें 80 से अधिक शोधपत्र पढ़े गये। संगोष्ठी का समापन बुधवार को होगा।



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