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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 8 अगस्त 2024 को पेश द्विमासिक मौद्रिक नीति में यह सुनिश्चित किया गया कि नीति में बदलाव से पहले मुख्य मुद्रास्फीति अनुकूल स्तर पर हो। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 4:2 के मत से नीतिगत रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखने और रुख को ‘अनुकूलन वापस लिए जाने’ (विथड्रॉअल ऑफ अकोमोडेशन) का फैसला किया । पिछली नीति की तरह, एमपीसी के दो वाह्य सदस्यों; प्रो. जयंत वर्मा और डॉ. आशिमा गोयल ने नीतिगत रेपो दर को 25 आधार अंक (बीपीएस) तक कम करने और रुख को ‘तटस्थ’ करने के पक्ष में अपना मत दिया।
आरबीआई अपनी नीति दर और रुख में सतर्क रहा क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला मुद्रास्फीति के संबंध में अब तक की गई अनुकूल पहलों को खतरे में डाल सकता है। मुख्य मुद्रास्फीति जून 2024 में 5.08 प्रतिशत रही, जबकि इसके पिछले महीने (मई 2024) यह 4.75 प्रतिशत थी। मुख्य मुद्रास्फीति अपने चरम स्तर से नीचे आ गई है, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है और सीपीआई मुद्रास्फीति में इसकी हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है। हालांकि, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025 के लिए मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। कोर मुद्रास्फीति 3.10 प्रतिशत (जून 2024) पर कम बनी हुई है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कम मूल (कोर) मुद्रास्फीति के संतुष्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि एमपीसी और मैंडेट का ध्यान मुख्य मुद्रास्फीति पर है। गवर्नर ने कहा कि 4त्न के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ दूरी तय करनी है क्योंकि मुद्रास्फीति कम हो रही है लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है।
वित्त वर्ष 2025 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि के लिए पूर्वानुमान 7.2 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा है। घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। विनिर्माण के लिए क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जुलाई 2024 में 58.1 पर रहा और सेवा क्षेत्र के लिए पीएमआई इसी अवधि में 60.3 पर रहा और लगातार सात महीनों तक 60 से ऊपर रहा, जिससे सेवा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि स्पष्ट होती है। कृषि क्षेत्र में विस्तार से ग्रामीण खपत में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके आलावा, कॉरपोरेट जगत और बैंकों (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सीआरएआर और सीईटी 1 अनुपात मार्च 2024 में 16.8त्न और 13.9 प्रतिशत रहा) की बैलेंस शीट मजबूत रही। हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में पूंजीगत व्यय पर जोर, राजकोषीय घाटे में कमी का लक्ष्य और निजी खपत में बढ़ोतरी के संकेत मजबूत आर्थिक विकास की स्थिति के बैरोमीटर हैं।
जहां तक तरलता की बात है तो गवर्नर ने ज्यादा कुछ नहीं कहा। हालांकि, जून 2024 में सिस्टम लिक्विडिटी कम में थी और जुलाई 2024 में अधिशेष में परिवर्तित हो गई। भारित औसत कॉल दर (डब्ल्यूएसीआर) एलएएफ कॉरिडोर के बीच में कहीं स्थित है। जमा प्रमाणपत्र (सीडी) और 3 महीने के टी-बिल पर प्रतिफल में गिरावट आई है, हालांकि सीपी स्थिर रहे हैं। 10 वर्षीय जी-सेक यील्ड, जून 2024 से अगस्त 2024 (6 अगस्त तक) के दौरान औसतन 6.97 प्रतिशत रहा, जबकि अप्रैल 2024 से मई 2024 के दौरान यह 7.08त्न था। इसके अलावा, आरबीआई ने प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को बाहर निकालने के लिए सरकारी बॉन्ड की कई वीआरआरआर और ओवर-द-काउंटर ओपन मार्केट बिक्री की है। आरबीआई अपने तरलता प्रबंधन में चुस्त तथा लचीला बना रहेगा और व्यवस्थित तरीके से मुद्रा बा?ार के विकास का लक्ष्य रखेगा। इसके अलावा, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2 अगस्त 2024 को 675 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।-दीपक अग्रवाल, सीआईओ-डेट, कोटक महिंद्रा एएमसी

