भारत में पिछले दो-तीन महीनों से आम लोग खाद्य पदार्थों में महंगाई की मार झेल रहे हैं, इससे उनका बजट भी गड़बड़ा गया है। इसी बीच राहत की खबर है कि एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत का ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी पर बरकरार रखा है और यह उम्मीद जताई है कि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर, 2024 में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत कर सकता है। ग्लोबल रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इसमें कहा गया कि भारत में ठोस वृद्धि से भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को अपने लक्ष्य के अनुरूप लाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा। वहीं भारत में अप्रैल-जून तिमाही में उच्च ब्याज दरों ने शहरी मांग को प्रभावित किया और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर धीमी रही। हालांकि यह समूचे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए हमारे सकल घरेलू उत्पाद के 6.8 प्रतिशत की दर के अनुमान के अनुरूप है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। वहीं यह परिदृश्य यथावत बना हुआ है। आरबीआई जल्द से जल्द अक्टूबर में दरों में कटौती शुरू कर देगा और चालू वित्त वर्ष (मार्च,2025 में समाप्त होने वाले) में दो बार दरों में कटौती की योजना बनाएगा। इसके अलावा एसएंडपी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति औसतन 4.5 प्रतिशत रहेगी। सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को दोनों तरफ दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया है। आरबीआई की ब्याज दर निर्धारित करने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक सात से नौ अक्टूबर को होने वाली है। महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने फरवरी, 2023 से नीतिगत दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने भी अपनी नीतिगत ब्याज दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती की है। इसके बाद आरबीआई के अगले महीने इसमें 0.25 प्रतिशत की कटौती करने की उम्मीद है।

