हर वर्ष की भांति आज विश्व चॉकलेट दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस केवल चॉकलेट खाने का अवसर नहीं है, बल्कि इसके इतिहास, संस्कृति, उत्पादन और संतुलित सेवन के महत्व को समझने का भी दिन है। 7 जुलाई, 1550 को कोको (कोकोआ) बीजों को पहली बार यूरोप लाया गया था, इसी ऐतिहासिक घटना की याद में यह तारीख चुनी गई। इससे पहले कोको का इस्तेमाल केवल पेय पदार्थ के रूप में होता था। वर्ष,1847 में ब्रिटिश चॉकलेट निर्माता जोसेफ फ्राई ने पिघले हुए कोको बटर और कोको पाउडर को मिलाकर पहली बार खाने वाली सॉलिड चॉकलेट बार बनाई थी। दुनियाभर में उत्सव के रूप में विश्व चॉकलेट दिवस पहली बार आधिकारिक तौर पर वर्ष, 2009 में मनाया गया था। चॉकलेट केवल एक स्वादिष्ट मिठाई नहीं है, बल्कि इसके कई मानसिक और शारीरिक लाभ भी हैं। चॉकलेट के सेवन से मस्तिष्क में एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और तनाव कम करता है। डार्क चॉकलेट (जिसमें कोको की मात्रा अधिक होती है) एंटीऑक्सीडेंट का एक बेहतरीन स्रोत है, जो रक्त संचार को सुधारने में मदद करती है। यह तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, इसलिए एथलीट और शारीरिक मेहनत करने वाले लोग भी इसका सेवन करते हैं। त्योहारों, शादियों या किसी को उपहार देने के लिए चॉकलेट दुनिया भर में प्यार और खुशी का एक सर्वमान्य प्रतीक है। इस दिन लोग अपने प्रियजनों के साथ विभिन्न प्रकार की चॉकलेट, केक और डेसर्ट साझा करके इस मीठे दिन का आनंद लेते हैं। पर अत्यधिक चॉकलेट खाने से नुकसान भी है, इसके लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। अधिक मात्रा में चॉकलेट खाने से अतिरिक्त चीनी और कैलोरी के कारण वजन बढऩे, दांतों की समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को चॉकलेट का सेवन चिकित्सकीय सलाह और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

