बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। भारत स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और केंद्रीय बजट में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए 15,000 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ है। यह स्वागत योग्य कदम है। इसने उद्योग के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। हालांकि, अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें सक्रिय पहल करें और क्षेत्र-विशिष्ट विकास को बढ़ावा देने, नीतियों को सुव्यवस्थित करने और स्थानीय उद्योग को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए एक समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की स्थापना करनी चाहिए।
राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नीतिन अग्रवाल ने कहा, जहां उद्योग को केंद्र सरकार की पहल से लाभ मिल रहा है, वहीं सौर सेल की कीमतों में वृद्धि जैसी चुनौतियां किसानों और डवलपर्स के लिए कठिनाइयां पैदा कर रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, राज्य सरकारों को कुछ महत्वपूर्ण सुधार लागू करने चाहिए।
इन सुधारों की आवश्यकता
1. स्थानीय निर्माताओं के लिए आरक्षण : यह सुनिश्चित करना कि राज्यस्तरीय खरीद नीतियां घरेलू सौर कंपनियों को प्राथमिकता दें और उन्हें बढ़ावा दें।
2. एसजीएसटी छूट और प्रोत्साहन : सौर उपकरणों पर राज्य जीएसटी में कटौती और विशेष विनिर्माण प्रोत्साहन प्रदान करके निवेश को आकर्षित करना।
3. पीएम सूर्यघर योजना में राज्य वित्तीय सहायता : यूपी और अन्य राज्यों के उदाहरण का पालन करते हुए अतिरिक्त राज्य सब्सिडी प्रदान करना, जिससे सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित किया जा सके।
4. आवासीय रूफ टॉप सोलर पर राज्य शुल्क मुक्त : राज्य स्तर पर लगाए जाने वाले शुल्क हटाकर घरेलू सौर संयंत्रों को अधिक किफायती बनाया जाए।
5. सौर विनिर्माण को बढ़ावा : सौर मॉड्यूल फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए समर्पित प्रोत्साहन और आधारभूत संरचना समर्थन प्रदान करना, जिससे भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति मजबूत हो।
6. राज्य-स्वामित्व वाले सौर क्लस्टर : संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक के लिए समर्पित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना, जिससे उत्पादन लागत में कमी आए और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया जा सके।
सरकार करे मंत्रालय स्थापित
राजस्थान, जो स्थापित सौर क्षमता में अग्रणी है, को अब एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए और एक समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की स्थापना करके नीतियों को सुव्यवस्थित करना, प्रशासनिक देरी को कम करना और हरित ऊर्जा में दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करना चाहिए। भारत के सौर उद्योग का भविष्य निर्णायक और रणनीतिक राज्य-स्तरीय कार्रवाई पर निर्भर करता है।
नीतिन अग्रवाल, सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन

