Sunday, July 12, 2026 |
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हर उम्र के लोगों के लिए फिजियोथेरेपी जरूरी होती जा रही है: डॉ. नरेश कुमार

by Business Remedies
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चारु भाटिया | बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। जैसेजैसे जीवनशैली अधिक निष्क्रिय और स्क्रीन पर निर्भर होती जा रही है, मस्क्युलोस्केलेटल दर्द और मूवमेंट से जुड़ी समस्याएं सभी आयु वर्गों में सबसे आम स्वास्थ्य चिंताओं में से एक बनती जा रही हैं। इस बदलते हेल्थकेयर परिदृश्य में फिजियोथेरेपी अब केवल मसाज या चोट के बाद की देखभाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित पद्धति बन चुकी है, जो शरीर की मूवमेंट को बहाल करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इस विस्तृत बातचीत में जयपुर स्थित किवा फिजियोथेरेपी क्लिनिक के संस्थापक डॉ. नरेश कुमार ने एक पेशेंटसेंट्रिक प्रैक्टिस बनाने के अपने सफर पर चर्चा की और बताया कि कैसे फिजियोथेरेपी आधुनिक रिहैबिलिटेशन को बदल रही है। खेल चोटों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के इलाज से लेकर रिकवरी प्लानिंग में एआई की भूमिका तक, उन्होंने इस क्षेत्र के बढ़ते दायरे, भारत में फिजियोथेरेपिस्ट्स के सामने आने वाली चुनौतियों और जागरूकता, शिक्षा और प्रिवेंटिव केयर के माध्यम से दर्दमुक्तभविष्य बनाने के अपने विजऩ पर बात की।

प्रश्न: आपजयपुरमेंकिवा फिजियोथेरेपी क्लिनिक चलाते हैं। अब तक आपका सफर कैसा रहा है?

उत्तर: फिजियोथेरेपी में मेरा सफर इस विश्वास से गहराई से प्रभावित रहा है कि मूवमेंट ही दवा है। शरीर के हर जोड़ की एक निश्चित मूवमेंट रेंज होती है और जब यह मूवमेंट सीमित हो जाती है, तो यह दर्द, सूजन और लंबे समय की जटिलताओं का कारण बनती है। फिजियोथेरेपी शरीर रचना, फिजियोलॉजी और बायोमैकेनिक्स की वैज्ञानिक समझ के माध्यम से इस प्राकृतिक मूवमेंट को बहाल करने पर काम करती है। जब मैंने कॉलेज में प्रवेश लिया, तब यह क्षेत्र आज जितना व्यापक है, उतना नहीं लगता था। अवसर सीमित नजर आते थे और फिजियोथेरेपी के बारे में जागरूकता भी कम थी। लेकिन जैसेजैसे मेरा कोर्स आगे बढ़ा, मुझे इसके व्यापक उपयोगों की जानकारी मिली। तब मुझे इस पेशे का महत्व समझ आया कि कैसे टार्गेटेड एक्सरसाइज और रिहैबिलिटेशन के माध्यम से बिना अधिक दवाइयों पर निर्भर हुए दर्द को कम किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

फिजियोथेरेपी कई मेडिकल क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम ऑर्थोपेडिक समस्याओं, न्यूरोलॉजिकल रिहैबिलिटेशन, ऑपरेशन के बाद रिकवरी, कार्डियक रिहैबिलिटेशन और यहां तक कि सीओपीडी जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों में भी काम करते हैं, जहां फिजियोथेरेपी म्यूकस हटाने और सांस लेने में सुधार करने में मदद करती है। खेलों में भी चोटों को संभालने और खिलाडिय़ों को सुरक्षित प्रदर्शन जारी रखने में फिजियोथेरेपी बेहद जरूरी है। इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मुझे संदीप माहेश्वरी का एक मोटिवेशनल वीडियो देखने के बाद मिली, जिसमें उन्होंने फिजियोथेरेपी के करियर स्कोप के बारे में बताया था। वहीं से मेरी रुचि जागी और तब से यह सफर चुनौतीपूर्ण होने के साथसाथ संतोषजनक भी रहा है।

प्रश्न: किवाफिजियोथेरेपी को अन्य केंद्रों से अलग क्या बनाता है?

उत्तर: किवा फिजियोथेरेपी में हम समस्या के मूल कारण की पहचान और उपचार पर विशेष ध्यान देते हैं, केवल अस्थायी राहत देने पर नहीं। हमारा तरीका यह समझने से शुरू होता है कि समस्या कैसे उत्पन्न हुई और फिर प्रत्येक मरीज के लिए एक्सरसाइज आधारित रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार किया जाता है। किवा का एक और महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा और प्रशिक्षण है। हम उन फिजियोथेरेपिस्ट्स को मार्गदर्शन देते हैं जो अपने कौशल को विकसित करना चाहते हैं और करियर के अवसर तलाशना चाहते हैं। हम ऑनलाइन क्लासेस भी प्रदान करते हैं, जिससे फिजियोथेरेपी का ज्ञान भौगोलिक सीमाओं से परे पहुंच सके।

हमने सभी आयु वर्ग के मरीजों का इलाज किया है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, और कई उल्लेखनीय परिणाम देखे हैं। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और नर्व डैमेज जैसे मामलों में संरचित एक्सरसाइज से रिकवरी में काफी सुधार हो सकता है। हमारे पास ऐसे कई उदाहरण हैं जहां मरीजों ने फिजियोथेरेपी के माध्यम से सर्जरी से बचाव किया। गंभीर स्थितियों जैसे डिस्क बल्ज वाले एथलीट्स ने रिहैबिलिटेशन के बाद मेडल भी जीते हैं। हमारा लक्ष्य सरल है: लोगों को दर्दमुक्तजीवन जीने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना।

प्रश्न: वर्षों में फिजियोथेरेपी में क्या बदलाव आया है?

उत्तर: पहले लोग फिजियोथेरेपी को केवल मसाज थेरेपी समझते थे लेकिन वास्तव में यह एक प्रमाण आधारित और रिसर्च आधारित क्षेत्र है। जिसके प्रति अब लोगों में इसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, खासकर तीव्र और पुरानी दोनों तरह के दर्द के प्रबंधन में।

तकनीकी प्रगति ने भी इस क्षेत्र को बदल दिया है। आधुनिक उपकरण और उन्नत मूल्यांकन तकनीकें फिजियोथेरेपिस्ट्स को अधिक प्रभावी तरीके से निदान और उपचार करने में सक्षम बनाती हैं। आज रिहैबिलिटेशन प्लान शरीर के व्यापक मूल्यांकन के बाद तैयार किए जाते हैं, जिससे दर्द के मूल कारण का समाधान हो सके। इस वैज्ञानिक और व्यक्तिगत उपचार दृष्टिकोण ने मरीजों के परिणामों में काफी सुधार किया है।

प्रश्न: आधुनिक जीवन शैली शरीर के दर्द को कैसे बढ़ा रही है?

उत्तर: आज की जीवनशैली मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं के बढऩे में बड़ी भूमिका निभा रही है। कोविड-19 के बाद कई नौकरियां ऑनलाइन हो गईं, जिससे लंबे समय तक बैठना और शारीरिक गतिविधि कम हो गई। इससे सर्वाइकल और लोअर बैक पेन के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। मोबाइल फोन का अधिक उपयोग और स्क्रीन टाइम ने पोस्चर से जुड़ी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। छात्र और प्रोफेशनल लंबे समय तक बैठे रहते हैं, जिससे उनकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। जब शरीर अपनी सहनशीलता की सीमा पार कर जाता है, तो दर्द शुरू हो जाता है। खासकर आईटी प्रोफेशनल्स में खराब बायोमैकेनिक्स के कारण गर्दन और कमर की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

प्रश्न: फिजियोथेरेपी में तकनीक और एआई की क्या भूमिका है?

उत्तर: एआई फिजियोथेरेपी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। यह मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर सकता है, रिपोर्ट तैयार कर सकता है और मूल्यांकन में मानवीय त्रुटियों को कम कर सकता है। आने वाले वर्षों में एआई चोट के पैटर्न और रिकवरी प्रगति के आधार पर रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम डिजाइन करने में भी मदद कर सकता है। यह चोट के एंगल और मूवमेंट पैटर्न का विश्लेषण करने में भी सहायक है, जिससे उपचार अधिक सटीक हो जाता है। अगले दशक में एआई फिजियोथेरेपी प्रैक्टिस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

प्रश्न: आज फिजियोथेरेपिस्ट्स को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

उत्तर: एक बड़ी चुनौती यह है कि फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए एक सुव्यवस्थित राष्ट्रीय परिषद का अभाव है। साथ ही, उन्हें हेल्थकेयर प्रोफेशनल के रूप में पर्याप्त मान्यता नहीं मिलती। कई लोग मानते हैं कि केवल वही डॉक्टर हैं जो दवाइयां लिखते हैं या सर्जरी करते हैं। हालांकि, फिजियोथेरेपिस्ट्स को स्थितियों का आकलन करने, मूल कारण पहचानने और रिहैबिलिटेशन प्लान बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। केरल हाई कोर्ट के एक निर्णय में  फिजियोथेरेपिस्ट्स को अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाने की मान्यता दी है। फिर भी जागरूकता और मान्यता में सुधार की आवश्यकता है।

प्रश्न: आप किन सामान्य समस्याओं का इलाज करते हैं?

उत्तर: हम अक्सर सर्वाइकल पेन, डिस्क बल्ज, स्पाइनल कॉर्ड समस्याएं, स्पोर्ट्स इंजरी, एंकल और फुट से जुड़ी समस्याएं और सेरेब्रल पाल्सी जैसी पीडियाट्रिक स्थितियों का इलाज करते हैं। हम डायबिटीज और थायरॉइड से जुड़ी फ्रोजन शोल्डर जैसी समस्याओं में भी मदद करते हैं। इन में से कई स्थितियों का प्रभावी इलाज फिजियोथेरेपी से संभव है।

प्रश्न: आपके केंद्र और भारत में फिजियोथेरेपी के भविष्य को लेकर आपका क्या विजऩ है?

उत्तर: मेरे क्लिनिक के भविष्य के लिए मेरा मुख्य लक्ष्य अधिक जागरूकता फैलाना और पूरे भारत में लोगों को दर्दमुक्त जीवन जीने में मदद करना है। मैं एक मजबूत और कुशल फिजियोथेरेपिस्ट्स की टीम बनाना चाहता हूं, जो ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिकल, पीडियाट्रिक और जेरियाट्रिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हों, ताकि मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ उपचार मिल सके।

जहां तक फिजियोथेरेपी के भविष्य की बात है, यह बेहद उज्ज्वल है। हर क्षेत्र में इसका महत्व बढ़ रहा है और रिसर्च के बढऩे के साथ फिजियोथेरेपिस्ट्स को अधिक अवसर मिल रहे हैं। खेलों में एसीएल टियर, डिस्क बल्ज और टेंडन इंजरी जैसी समस्याएं आम हैं और कई मामलों में खिलाड़ी फिजियोथेरेपी के बाद पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह खेल उद्योग में फिजियोथेरेपी के बड़े स्कोप को दर्शाता है।

फिजियोथेरेपी में रिहैबिलिटेशन प्लान चरणों में तैयार किए जाते हैं, जिसमें पहले दर्द से राहत, फिर मूवमेंट बहाल करना और अंत में ताकत बढ़ाना शामिल होता है। प्रिवेंटिव इंजरी प्रोग्राम भी लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे चोट लगने से पहले ही बचाव किया जा सके। सटीक निदान और प्रभावी उपचार के लिए विशेष आकलन किए जाते हैं।

प्रश्न: फिजियोथेरेपी के लिए सरकार के समर्थन पर आपका क्या दृष्टिकोण है?

उत्तर: वर्तमान में सरकार का रुख बहुत प्रोत्साहनजनक नहीं है। राजस्थान में फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए कोई समर्पित परिषद नहीं है और रोजगार के अवसर बहुत सीमित हैं। जहां रिक्तियां होती भी हैं, वे अधिकतर केंद्रीय स्तर पर होती हैं। कई फिजियोथेरेपिस्ट्स को कॉन्ट्रैक्ट या टेंडर आधार पर नियुक्त किया जाता है और उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन मिलता है।

इस कारण अधिकांश पेशेवरों के पास निजी क्लिनिक खोलने या अस्पतालों में काम करने का विकल्प ही बचता है। दुर्भाग्यवश, लंबे कार्य घंटों के बावजूद उन्हें कम वेतन के रूप में शोषण का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि भारत कई प्रतिभाशाली फिजियोथेरेपिस्ट्स को विदेशों में अवसरों के कारण खो रहा है। यदि उन्हें उचित मान्यता और पारिश्रमिक मिले, तो भारत में हेल्थकेयर सेवाएं काफी बेहतर हो सकती हैं।

प्रश्न: अंत में, आप फिजियोथेरेपी के इच्छुक छात्रों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: मैं कहना चाहूंगा कि यह क्षेत्र बहुत संभावनाओं से भरा हुआ है और इसमें सीखने और आगे बढऩे के असीम अवसर हैं। किसी भी अन्य पेशे की तरह, सही सोच और दृष्टिकोण के साथ यह क्षेत्र भी करियर संतुष्टि, पहचानऔरआर्थिकस्थिरताप्रदानकरसकताहै।

जिन छात्रों ने सीनियर सेकेंडरी में बायोलॉजी के साथ विज्ञान की पढ़ाई की है, वे सीधे फिजियोथेरेपी में प्रवेश ले सकते हैं। कॉलेज के शुरुआती वर्षों में कुछ छात्रों को यह क्षेत्र सीमित लग सकता है, लेकिन यह सही नहीं है। शुरुआती साल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि यही पूरे विषय की नींव तैयार करते हैं। मैं छात्रों को प्रोत्साहित करता हूं कि वे ध्यान केंद्रित रखें, समर्पण के साथ पढ़ाई करें और मूलभूत ज्ञान को मजबूत बनाएं, क्योंकि यही उनके भविष्य की सफलता तय करेगा।



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