- अब तक की सबसे अधिक 14.5% राजस्व वृद्धि,जो रुपये315.79 करोड़ तक पहुँची
- कर पूर्व लाभ (पीबीटी)में 58.5% की वृद्धि,जो रुपये 16.99 करोड़ हुआ
- कर पश्चात लाभ (पीएटी)में 76% की वृद्धि,जो रुपये 12.69 करोड़ हुआ
नाशिक। एंड-टू-एंड सिंचाई और जल प्रबंधन समाधान प्रदान करने वाली अग्रणी कंपनी महिंद्रा ईपीसी इरिगेशन लिमिटेड ने आज 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 26) के अपने वार्षिक वित्तीय परिणामों की घोषणा की। चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों के बावजूद कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की।
वित्त वर्ष 26 में कंपनी ने रुपये 315.79 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 25 के रुपये 275.09 करोड़ की तुलना में 14.5% की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि है। कर पूर्व लाभ (पीबीटी) में 58.5% की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष के रुपये 10.71 करोड़ से बढ़कर रुपये 16.99 करोड़ हो गया। वहीं, कर पश्चात लाभ (पीएटी) में 76% की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष के रुपये 7.21 करोड़ से बढ़कर रुपये 12.69 करोड़ हो गया, जो मजबूत परिचालन प्रदर्शन और अनुशासित वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।
प्रदर्शन की मुख्य बातें
यह मजबूत प्रदर्शन केंद्रित बाजार विकास पहलों, गैर-सब्सिडी व्यवसाय के अवसरों की ओर सोच-समझकर किए गए बदलाव, बेहतर वित्तीय अनुशासन और संगठनात्मक क्षमताओं के निर्माण में निरंतर निवेश के कारण संभव हुआ।
वित्त वर्ष26 के दौरान उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें नोडल एजेंसियों द्वारा फंड जारी करने में देरी, प्रमुख क्षेत्रों में असमान और अत्यधिक वर्षा का पैटर्न, तथा वर्ष के अंत में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का इनपुट लागत और बाजार भावना पर प्रभाव शामिल थे।
इन चुनौतियों के बावजूद, महिंद्रा ईपीसी इरिगेशन ने अब तक का सबसे अधिक वार्षिक राजस्व हासिल किया, जो इसके बिजनेस मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।
कंपनी ने कुछ प्रमुख राज्यों में एकाग्रता जोखिम को कम करने और आंतरिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए अपने परिचालन को सावधानीपूर्वक संतुलित किया। इन उपायों के साथ-साथ सरकारी सब्सिडी से स्वतंत्र अवसरों के निर्माण के निरंतर प्रयासों ने लाभप्रदता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कंपनी ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए मजबूत वर्क ऑर्डर पाइपलाइन भी विकसित की, जिससे भविष्य की वृद्धि के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है।
आउटलुक
आगे देखते हुए, कंपनी वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और आगामी मानसून सीजन पर करीबी नजर रख रही है और उसी के अनुसार अपनी बाजार रणनीति को पुनः निर्धारित कर रही है।
माइक्रो इरिगेशन सिस्टम पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% किए जाने, माइक्रो इरिगेशन कवरेज बढ़ाने पर सरकार के बढ़ते फोकस, प्रमुख राज्यों में नई गतिविधियों और नए बाजारों के उभरने के साथ, आने वाले वर्षों में माइक्रो-इरिगेशन उद्योग में स्थिर वृद्धि की उम्मीद है।

