Wednesday, May 20, 2026 |
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अनिश्चित वैश्विक हालात में Monetary Policy के लिए Inflation Expectations को स्थिर रखना जरूरी

by Business Remedies
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SBI Report On Monetary Policy And Inflation Expectations In India

भारतीय स्टेट बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता के दौर में Monetary Policy को प्रभावी बनाए रखने के लिए Inflation Expectations को मजबूती से स्थिर रखना बेहद आवश्यक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए Inflation को नियंत्रित करना और Growth को संतुलित रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसे समय में एक मजबूत केंद्रीय बैंक को सतर्क रहना चाहिए, जोखिमों के प्रति सख्त रुख अपनाना चाहिए, अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए, परिस्थितियों के अनुसार लचीला होना चाहिए और अपनी नीतियों में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। इससे आर्थिक अनिश्चितता के कारण लोगों का भरोसा कमजोर नहीं होता। SBI के Group Chief Economic Adviser डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा हाल ही में Princeton University में दिए गए भाषण से यही संकेत मिलता है कि आने वाले समय में Monetary Policy का रुख क्या हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष2027 में भारत का Balance Of Payments लगभग -$28 Billion रहने का अनुमान है, जिसमें व्यापार संतुलन भी नकारात्मक रहने की संभावना है। हालांकि Capital Account में लगभग $26.5 Billion का अधिशेष रहने की उम्मीद जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार Exchange Rate को हमेशा के लिए झटकों को सहने वाला साधन नहीं माना जा सकता। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और अस्थिरता के कारण यह Imported Inflation को बढ़ावा दे सकता है, जिससे Inflation Expectations प्रभावित होती हैं और Monetary Policy के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार तीसरे वर्ष Balance Of Payments के नकारात्मक रहने की आशंका को देखते हुए व्यापक नीतिगत कदम उठाना आवश्यक हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल Inflation Expectations पूरी तरह से अस्थिर नहीं हुई हैं, इसलिए Monetary Policy के पास अभी सीमित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। Supply से जुड़ी महंगाई के सीधे प्रभावों को नियंत्रित करने की इसकी क्षमता सीमित होती है, लेकिन जब इसका असर कीमतों और वेतन पर दिखने लगता है, तब इसका महत्व बढ़ जाता है।



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