Wednesday, May 20, 2026 |
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अमेरिकी प्रतिबंध आशंकाओं के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी

by Business Remedies
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crude oil barrels with rising price chart amid global tension

नई दिल्ली,

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को लगातार बढ़त देखी गई, क्योंकि खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर अपना प्रतिबंध जारी रख सकता है। इससे मध्य पूर्व क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की आशंका और गहरा गई है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत में 0.63प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 111.97डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 0.81प्रतिशत बढ़कर 100.74डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान के खिलाफ लंबे समय तक बंदरगाह प्रतिबंध की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम वॉशिंगटन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके समुद्री व्यापार को सीमित करना है।

हालांकि बाद में कुछ गिरावट भी देखी गई, जहां ब्रेंट क्रूड 111.12डॉलर पर 0.13प्रतिशत नीचे रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई 99.32डॉलर पर 0.6प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। घरेलू वायदा बाजार में, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल 0.88प्रतिशत या Rs.84 की गिरावट के साथ Rs.9401पर कारोबार करता नजर आया।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा वहन करता है, वहां जारी तनाव भी कीमतों को सहारा दे रहा है। अप्रैल के पहले सप्ताह में अमेरिका और ईरान समर्थित बलों के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन अब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। ईरान ने जलडमरूमध्य के जरिए शिपिंग गतिविधियों को सीमित कर रखा है, जबकि अमेरिका का बंदरगाह प्रतिबंध अब भी जारी है। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है, खासकर तब जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में ढील को लेकर वार्ताएं धीमी गति से चल रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में हो रही गतिविधियों के बावजूद ऊर्जा संकट का समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा। संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने का निर्णय मध्यम अवधि में कीमतों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन निकट भविष्य में राहत की उम्मीद कम है। विशेषज्ञ ने कहा कि 110डॉलर के आसपास ब्रेंट क्रूड की कीमत भारत के लिए नकारात्मक संकेत है। जब तक कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, तब तक आर्थिक विकास पर दबाव और महंगाई का जोखिम बना रहेगा।



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