Home Business and Economyअप्रैल 2026 में थोक महंगाई में तेज उछाल, ईंधन और ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाया दबाव

अप्रैल 2026 में थोक महंगाई में तेज उछाल, ईंधन और ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाया दबाव

by Business Remedies
0 comments
India Wholesale Inflation Rises Due To Sharp Increase In Fuel And Energy Prices In April 2026

नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में देश की थोक महंगाई दर में बड़ा उछाल देखने को मिला। उद्योग संगठनों के अनुसार, ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी कीमतों में तेज बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही। खासतौर पर कच्चे पेट्रोलियम, खनिज तेल और धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण कई विनिर्माण क्षेत्रों की लागत बढ़ गई है।

भारत की थोक महंगाई दर अप्रैल 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 8.3प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मार्च 2026 में यह 3.88 प्रतिशत थी। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि हाल के महीनों की तुलना में खाद्य वस्तुओं से जुड़ी महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, लेकिन ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई तेजी ने कुल महंगाई को ऊपर धकेला। ईंधन और बिजली समूह की महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 24.71 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्च 2026 में यह केवल 1.05 प्रतिशत थी। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर बढ़कर 67.18 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं पेट्रोल की महंगाई 32.40 प्रतिशत और हाई स्पीड डीजल की महंगाई 25.19प्रतिशत दर्ज की गई।

वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति में बाधाएं और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ता दबाव प्रमुख कारण बताए गए हैं। इसका सीधा असर भारत के ऊर्जा आयात खर्च और औद्योगिक लागत पर पड़ा है। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई अप्रैल में बढ़कर 9.17 प्रतिशत हो गई। इसमें कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खाद्य वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा योगदान रहा। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई भी बढ़कर 4.62 प्रतिशत पहुंच गई। इसमें मूल धातु, रसायन, वस्त्र, मशीनरी और खाद्य उत्पाद क्षेत्रों में व्यापक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने से आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

मासिक आधार पर अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक में मार्च 2026 की तुलना में 3.86 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ईंधन और बिजली समूह में अकेले 18.22 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। विनिर्मित उत्पादों में मूल धातुओं की महंगाई 7.00 प्रतिशत, वस्त्र क्षेत्र की 7.30 प्रतिशत और रसायन एवं रासायनिक उत्पादों की 5.09 प्रतिशत रही। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

सभी वस्तुओं का अस्थायी थोक मूल्य सूचकांक अप्रैल 2026 में बढ़कर 167.0 पहुंच गया, जो मार्च 2026 में 160.8 था। वहीं फरवरी 2026 की अंतिम थोक महंगाई दर संशोधित होकर 2.26 प्रतिशत कर दी गई। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि आने वाले महीनों में वैश्विक ऊर्जा कीमतों, कमोडिटी बाजार और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति पर विशेष नजर रखनी होगी। ईंधन लागत में उतार-चढ़ाव का असर विनिर्माण और परिवहन क्षेत्रों पर लगातार पड़ता रहेगा।



You may also like

Leave a Comment