Sunday, June 14, 2026 |
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अप्रैल में भारत की WPI महंगाई दर बढ़कर 8.3प्रतिशत पहुंची, कच्चे तेल और ईंधन कीमतों में तेज उछाल

by Business Remedies
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नई दिल्ली। मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर अब भारत की थोक महंगाई पर भी दिखाई देने लगा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में भारत की WPI महंगाई दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले मार्च महीने में यह आंकड़ा 3.88 प्रतिशत था। सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन और बिजली समूह में अप्रैल के दौरान मासिक आधार पर 18.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 29.37 प्रतिशत की तेज वृद्धि रहा। हालांकि, बिजली की कीमतों में 2.53 प्रतिशत की गिरावट से कुछ राहत मिली।

खाद्य वस्तुओं की बात करें तो खाद्य सूचकांक में अप्रैल के दौरान 2.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें अनाज, दालें और निर्मित खाद्य उत्पाद शामिल हैं। वहीं, खाद्य महंगाई दर 1.85प्रतिशत पर स्थिर बनी रही। निर्मित उत्पादों के क्षेत्र में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल सूचकांक में 64.23 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस समूह में अप्रैल के दौरान 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। समूह के 22 में से 21उत्पादों की कीमतों में इजाफा हुआ, जबकि केवल एक उत्पाद की कीमत में गिरावट दर्ज की गई।

दूसरी ओर, खुदरा महंगाई यानी CPI आधारित महंगाई दर अप्रैल में 3.48 प्रतिशत रही। मार्च महीने में यह 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। बिजली, गैस और अन्य ईंधन से जुड़ी खुदरा महंगाई दर अप्रैल में 1.71 प्रतिशत रही। वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बावजूद सरकार ने इसका पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला, जिससे खुदरा महंगाई नियंत्रित रही। अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा महंगाई चांदी के आभूषणों में देखने को मिली, जिनकी कीमतों में 144.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। वहीं, सोने के आभूषण 40.72 प्रतिशत महंगे हुए।

खाद्य वस्तुओं में आलू की कीमतों में 23.69 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्याज 17.67 प्रतिशत सस्ता हुआ। चना और मटर की कीमतों में भी कमी दर्ज की गई। हालांकि, टमाटर की कीमतों में 35.28 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर भारत की महंगाई दर, परिवहन लागत और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है।



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