Monday, July 6, 2026 |
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भारत का स्मार्टफोन निर्यात 1 लाख करोड़ रुपए पार, एप्पल सबसे आगे

अमेरिकी बाजार में "मेड-इन-इंडिया" आईफोन की मांग तेजी से बढ़ी

by Business Remedies
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भारत का स्मार्टफोन निर्यात नई ऊँचाइयों पर, एप्पल ने दिलाई वैश्विक पहचान

भारत ने वैश्विक स्मार्टफोन निर्यात बाजार में एक बड़ी छलांग लगाई है। चालू वित्त वर्ष के पहले पाँच महीनों में देश का स्मार्टफोन निर्यात एक लाख करोड़ रुपए के पार निकल गया, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। यह आंकड़ा न केवल भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में देश की अहमियत को भी रेखांकित करता है।

सबसे बड़ी भूमिका टेक्नोलॉजी दिग्गज एप्पल की रही है। इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स—टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन—ने निर्यात में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान दिया। यह योगदान भारत में लागू प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसने वैश्विक कंपनियों को यहां उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार

दिलचस्प बात यह है कि भारत से होने वाले आईफोन निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में जा रहा है। 2025 की पहली छमाही में भारत में बने 78 प्रतिशत आईफोन अमेरिका को भेजे गए। एक साल पहले यह हिस्सा 53 प्रतिशत था। इस बदलाव ने भारत की वैश्विक हिस्सेदारी को मजबूत किया है। वर्तमान में अमेरिकी स्मार्टफोन आयात में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि चीन की हिस्सेदारी घटकर 25 प्रतिशत पर सिमट गई है। यह गिरावट पिछले साल 61 प्रतिशत थी।

“मेड-इन-इंडिया” स्मार्टफोन की तेजी

देश में निर्मित स्मार्टफोन की कुल मात्रा में सालाना आधार पर 240 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत है कि भारत न केवल घरेलू मांग पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है। वर्तमान में भारत में 300 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या केवल दो थी। इतना ही नहीं, आज भारत में बिकने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं निर्मित होते हैं।

प्रतिस्पर्धा और अवसर

सैमसंग और मोटोरोला जैसी कंपनियों ने भी भारत से अमेरिका को निर्यात बढ़ाना शुरू किया है, हालांकि एप्पल की तुलना में यह रफ्तार काफी धीमी है। सैमसंग का मुख्य उत्पादन केंद्र वियतनाम और मोटोरोला का चीन में है, जबकि एप्पल धीरे-धीरे चीन से अपनी सप्लाई चेन को भारत की ओर मोड़ रहा है। यही वजह है कि भारत, चीन और वियतनाम के साथ मिलकर अब वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का अहम केंद्र बन गया है।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में और तेज होगा। एप्पल जैसे बड़े खिलाड़ी ने भारत में निवेश और उत्पादन बढ़ाकर अन्य कंपनियों के लिए भी रास्ता आसान किया है। इससे रोजगार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय वैल्यू चेन में मजबूती आएगी।

भारत का स्मार्टफोन निर्यात केवल विदेशी मुद्रा अर्जन का साधन नहीं है, बल्कि यह देश की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती भूमिका का संकेत है। “मेड-इन-इंडिया” अब केवल नारा नहीं रहा, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में भारत की नई पहचान बन चुका है।



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