Monday, July 6, 2026 |
Home CommodityE-20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर पूर्व बीपीसीएल अधिकारी का बड़ा बयान, बताया वर्षों की सुनियोजित पहल

E-20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर पूर्व बीपीसीएल अधिकारी का बड़ा बयान, बताया वर्षों की सुनियोजित पहल

by Business Remedies
0 comments
Former BPCL Official R Ramachandran Explains E20 Ethanol Blending Programme And India Energy Security

मुंबई, Date 5 जुलाई। पूर्व बीपीसीएल (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के रिफाइनरी निदेशक आर. रामचंद्रन ने कहा है कि ई 20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम किसी जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह कई वर्षों तक चली एक सुनियोजित और चरणबद्ध पहल का परिणाम है। इस कार्यक्रम में तेल विपणन कंपनियों, एथेनॉल उत्पादकों, ऑटोमोबाइल उद्योग, अनुसंधान वैज्ञानिकों और ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों सहित सभी प्रमुख हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही है। उन्होंने बताया कि इस समन्वित प्रक्रिया के कारण तकनीकी, परिचालन और नीतिगत सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया गया। इसके बाद ही इस कार्यक्रम को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा गया, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की बड़ी तकनीकी या व्यावहारिक समस्या की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सके।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान आर. रामचंद्रन ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर चल रहे उन वीडियो की जानकारी नहीं है जिनका कुछ लोग उल्लेख कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ई 20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम एक सुविचारित और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसमें तेल कंपनियों, एथेनॉल उत्पादकों, ऑटोमोबाइल उद्योग, अनुसंधान वैज्ञानिकों तथा ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों ने मिलकर काम किया है। उच्च एथेनॉल मिश्रण के संबंध में उन्होंने कहा कि ई 85 को लेकर फिलहाल भारत सरकार की कोई औपचारिक नीति या कार्यान्वयन योजना मौजूद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे केवल भविष्य की संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में विचार करने की प्रेरणा ब्राज़ील जैसे देशों से मिली है, जहां ई 100 ईंधन का विकास किया गया है और उसका उपयोग फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक के साथ किया जाता है। हालांकि भारत में अभी इस प्रकार की किसी व्यवस्था को लागू करने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में औद्योगिक विस्तार के दौरान पानी की बढ़ती आवश्यकता पर चिंता व्यक्त करते हुए आर. रामचंद्रन ने कहा कि उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका मानना है कि उद्योगों को पानी के अधिकतम पुनर्चक्रण की दिशा में काम करना होगा ताकि प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव कम किया जा सके।

उन्होंने कहा कि उद्योगों को लगभग 100 प्रतिशत जल पुनर्चक्रण का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। इसके साथ ही शोधित अपशिष्ट जल का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए और रिवर्स ऑस्मोसिस तथा डीमिनरलाइजेशन संयंत्र जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर औद्योगिक उपयोग योग्य पानी तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उद्योगों को पानी पर निर्भर पारंपरिक शीतलन प्रणालियों की जगह वायु आधारित, संपीड़ित वायु तथा शीतल वायु जैसी वैकल्पिक शीतलन तकनीकों को अपनाना चाहिए। इससे पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और औद्योगिक संचालन अधिक टिकाऊ बन सकता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बोलते हुए आर. रामचंद्रन ने कहा कि पिछले 5 से 6 वर्षों के दौरान देश ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में लगातार विविधता लाई है। यही रणनीति भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय तेल उद्योग ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर कच्चे तेल की खरीद के लिए नए स्रोत विकसित किए हैं। इसके कारण यदि किसी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधा उत्पन्न होती है, तब भी भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चे तेल की व्यवस्था कर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम रहेगा।



You may also like

Leave a Comment