बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। सुनियोजित प्रबंधन और अदम्य संकल्प का परिचय देते हुए भारतीय रेलवे ने कोविड-19 महामारी के कठिन दौर से उबरकर वित्तीय स्थिरता प्राप्त की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में इस उल्लेखनीय पुनरुद्धार की जानकारी देते हुए रेलवे की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जो इसकी मजबूत वापसी को दर्शाती हैं।
वित्तीय पुनरुद्धार
वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने लगभग रूपये 2.78 लाख करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो इसके रूपये 2.75 लाख करोड़ के कुल व्यय से थोड़ा अधिक रहा। इस व्यय में रूपये 1.16 लाख करोड़ स्टाफ व्यय, रूपये 66,000 करोड़ पेंशन देयता, रूपये 32,000 करोड़ ऊर्जा व्यय, और रूपये 25,000 करोड़ वित्तीय लागत शामिल हैं। मंत्री वैष्णव ने इस वित्तीय संतुलन को परिचालन क्षमता में सुधार का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
परिचालन उपलब्धियाँ
भारतीय रेलवे की पुनरुत्थान यात्रा को कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से बल मिला है:
माल ढुलाई क्षमता: भारतीय रेलवे 1.6 अरब टन माल परिवहन के लक्ष्य के साथ 31 मार्च 2025 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी माल परिवहन रेलवे बनने की ओर अग्रसर है, जिसमें चीन और अमेरिका शीर्ष स्थान पर हैं।
बुनियादी ढांचा विकास: रेलवे ने 50,000 किमी ट्रैक बदले, 12,000 से अधिक अंडरपास और फ्लाईओवर बनाए, और 14,000 पुलों का पुनर्निर्माण किया। इसके अलावा, 41,000 लिंक हॉफमैन बुश (LHB) कोचों का निर्माण किया गया, जिससे यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षा में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। विद्युतीकरण और ऊर्जा दक्षता: 2019 के बाद से रेलवे के विद्युतीकरण प्रयासों के कारण ऊर्जा लागत रूपये 30,000-32,000 करोड़ के बीच स्थिर बनी हुई है, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ सुनिश्चित हुए हैं।
यात्री सब्सिडी और किफायती किराया संरचना
भारतीय रेलवे अपने सामाजिक दायित्व के तहत यात्रियों को भारी सब्सिडी प्रदान करता है। वास्तविक लागत रूपये 1.38 प्रति किमी है, जबकि यात्रियों से केवल 72 पैसे प्रति किमी लिया जाता है, जिससे रेलवे को रूपये 57,000 करोड़ की सब्सिडी देनी पड़ती है। इसके बावजूद, भारतीय रेलवे ने दुनिया में सबसे किफायती किराया बनाए रखा है। उदाहरण के लिए, 350 किमी की यात्रा के लिए सामान्य श्रेणी का किराया भारत में रूपये 121, पाकिस्तान में रूपये 400, और श्रीलंका में रूपये 413 है। उल्लेखनीय रूप से, ये किराए 2020 से अपरिवर्तित हैं, जिससे रेलवे की जनहित प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
वैश्विक उपस्थिति और भविष्य की योजनाएँ
भारतीय रेलवे अब यूके, सऊदी अरब, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और मैक्सिको जैसे देशों को मेट्रो कोचों का निर्यात कर अपनी वैश्विक पहचान बना रहा है। घरेलू स्तर पर, रेलवे ICF कोचों को LHB कोचों से बदलने और अगले वर्ष 1,400 लोकोमोटिव के उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है। मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारतीय रेलवे की यह यात्रा संघर्ष से उन्नति और दृढ़ संकल्प से नवाचार की ओर एक प्रेरणादायक उदाहरण है। रेलवे की यह रणनीतिक योजना इसे आने वाले वर्षों में निरंतर वृद्धि और उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए तैयार कर रही है।

