Home Breaking Newsखुदरा महंगाई दर अप्रैल में बढक़र 3.48 प्रतिशत रही

खुदरा महंगाई दर अप्रैल में बढक़र 3.48 प्रतिशत रही

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज |भारत में खुदरा महंगाई दर अप्रैल में सालाना आधार पर 3.48 प्रतिशत रही है, जो कि मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को दी गई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल में ग्रामीण क्षेत्र में खुदरा महंगाई दर 3.74 प्रतिशत रही है।

वहीं, शहरी क्षेत्र में यह 3.16 प्रतिशत थी। अप्रैल में खाद्य महंगाई दर 4.20 प्रतिशत रही है, जो कि मार्च में 3.87 प्रतिशत थी। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 4.26 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.10 प्रतिशत रही है।

मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल में सालाना आधार पर जिन पांच चीजों के दाम कम हुए हैं, उनमें आलू (-23.69 प्रतिशत), प्याज (-17.67 प्रतिशत), मोटर कार और जीप (-7.12 प्रतिशत), मटर और चना (-6.75 प्रतिशत) और एयर कंडीशनर (-5.06 प्रतिशत) शामिल हैं।

इस दौरान जिन पांच चीजों के दाम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उनमें चांदी की ज्वेलरी (144.34 प्रतिशत), नारियल (44.55 प्रतिशत), सोना/चांदी/प्लेटिनम ज्वेलरी (40.72 प्रतिशत), टमाटर (35.28 प्रतिशत) और फूलगोभी (25.58 प्रतिशत) शामिल हैं।

सरकारी डेटा के मुताबिक, सेगमेंट आधार पर अप्रैल में फूड और बेवरेज (4.01 प्रतिशत), पान तंबाकू और Intoxicants (4.76 प्रतिशत), कपड़े और जूते (2.80 प्रतिशत), हेल्थ (1.64 प्रतिशत), सूचना और संचार (2.11 प्रतिशत), शैक्षिक सेवाओं (3.15 प्रतिशत) में महंगाई दर रही है।

सरकार ने बताया कि Telangana (5.81 प्रतिशत), Andhra Pradesh (4.20 प्रतिशत), Tamil Nadu (4.18 प्रतिशत), Karnataka (4.00 प्रतिशत) और Rajasthan (3.77 प्रतिशत) के खुदरा महंगाई में अप्रैल में शीर्ष पर थे।

RBI का अनुमान और Sanjay Malhotra का बयान

Reserve Bank of India (RBI) ने 2026-27 के लिए देश की खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इसका कारण रबी की अच्छी फसल से निकट भविष्य में खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं बेहतर रहना है।

RBI Governor Sanjay Malhotra ने कहा, “वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के चलते प्रीमियम पेट्रोल, LPG और औद्योगिक उपयोग के लिए डीजल जैसे कुछ ईंधनों की कीमतों में वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, रबी की अच्छी फसल से निकट भविष्य में खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं बेहतर हुई हैं, जिससे कुछ राहत मिली है।”



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