नई दिल्ली: भारत का पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (PMS) उद्योग, जो वर्तमान में लगभग ₹.42 लाखकरोड़ की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है और 2.1लाखसेअधिक निवेशक खातों को सेवाएं प्रदान करता है, एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि यह उद्योग भविष्य में देश के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है। APMI Leadership Conclave 2026 को संबोधित करते हुए SEBI के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि PMS उद्योग के अगले विकास चरण की नींव पारदर्शिता, मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और निवेशक संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत में PMS उद्योग ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां निवेशकों की अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं और व्यक्तिगत संपत्ति प्रबंधन समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उद्योग के पास देश के निवेश ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का बड़ा अवसर है। मनोज कुमार के अनुसार, पूरे उद्योग में मानकीकरण, बेहतर आंकड़ा पारदर्शिता तथा अधिक मजबूत वितरण तंत्र इस क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक होंगे। उन्होंने कहा कि यदि उद्योग इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है तो निवेशकों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में उद्योग की पहुंच बढ़ाना, निवेशकों के बीच जागरूकता को मजबूत करना, जिम्मेदार वितरण पद्धतियों को अपनाना तथा सभी हितधारकों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना भविष्य की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इससे एक मजबूत, भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी PMS उद्योग का निर्माण किया जा सकेगा। यह सम्मेलन एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (APMI) द्वारा आयोजित किया गया था, जो SEBI में पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधकों का प्रतिनिधि संगठन है। APMI के अध्यक्ष बिहारीलाल देओरा ने कहा कि बढ़ती निवेशक जागरूकता, अनुकूलित निवेश समाधानों की बढ़ती मांग और सहयोगी नियामकीय ढांचे के कारण PMS उद्योग भारत के संपत्ति प्रबंधन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि APMI उद्योग से जुड़े प्रतिभागियों और SEBI के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि निवेशक संरक्षण, उद्योग विकास और बाजार की निष्पक्षता जैसे साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके। देओरा ने बताया कि वर्ष 2022 में संचालन शुरू करने के बाद से संगठन लगभग 50 रणनीतिक पहलों पर काम कर चुका है। इन पहलों का मुख्य फोकस निवेशक संरक्षण, नियामकीय अनुपालन, पारदर्शिता, डिजिटल परिवर्तन, पेशेवर क्षमता निर्माण और कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देना रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य उद्योग को अधिक संगठित, पारदर्शी और निवेशक-केंद्रित बनाना है, जिससे दीर्घकाल में निवेशकों और उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा। सम्मेलन में नियामक संस्थाओं, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, वितरकों, पारिवारिक निवेश कार्यालयों और संपत्ति प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उद्योग के अगले विकास चरण को आकार देने वाले अवसरों, चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

