नई दिल्ली,
भारत दुनिया के प्रमुख Skilled Visa कार्यक्रमों में शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के सबसे बड़े निर्यातक देश के रूप में अपनी मजबूत पहचान कायम रखे हुए है। Workforce Management Services कंपनी ‘दील’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका के H-1B Visa के लिए सबसे बड़ा स्रोत है, जबकि United Kingdom के Skilled Worker Visa और European Union Blue Card कार्यक्रम में दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत वैश्विक स्तर पर कुशल पेशेवरों की मांग को लगातार पूरा कर रहा है। बदलते वैश्विक प्रवासन रुझानों के बीच भारतीय प्रतिभाओं को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है क्योंकि कंपनियां अब लागत कम करने की बजाय दुर्लभ और विशेषज्ञ कौशल वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं।
संयुक्त अरब अमीरात में भी भारतीय पेशेवरों का दबदबा कायम है। भारतीय नागरिक UAE Golden Visa और सामान्य रोजगार Visa दोनों श्रेणियों में सबसे आगे रहे हैं। वर्तमान में भारतीय समुदाय संयुक्त अरब अमीरात की कुल आबादी का 38 प्रतिशत हिस्सा है, जो वहां उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है। 150 से अधिक देशों में 40,000 से ज्यादा कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में पाया गया कि Visa धारकों को समान पदों पर कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय भर्ती का मुख्य कारण कौशल की कमी है, न कि कम वेतन पर कर्मचारियों को नियुक्त करना।
अमेरिका में H-1B Visa धारकों की औसत वार्षिक आय 1.40लाख डॉलर रही, जबकि समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी नागरिकों की औसत आय 1.30लाख डॉलर दर्ज की गई। इसी प्रकार United Kingdom में Skilled Worker Visa धारकों की औसत आय 96,000 पाउंड रही, जबकि स्थानीय नागरिकों की औसत आय 87,000 पाउंड रही। वहीं UAE Golden Visa धारकों की औसत आय 6,05,000 दिरहम रही, जबकि सामान्य रोजगार Visa धारकों की औसत आय 4,59,000 दिरहम दर्ज की गई। भारतीय प्रतिभाओं की भर्ती में ऑस्ट्रेलिया सबसे तेजी से उभरता हुआ बाजार बनकर सामने आया है। दील के मंच पर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय पेशेवरों की भर्ती सालाना आधार पर 724 प्रतिशत बढ़ी है। इसके बाद United Kingdom में 142 प्रतिशत और अमेरिका में 139 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारतीय पेशेवरों के लिए संयुक्त अरब अमीरात अब भी सबसे प्रमुख वैश्विक गंतव्य बना हुआ है। इसके बाद सिंगापुर, United Kingdom, अमेरिका और कनाडा का स्थान है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है, विशेष रूप से इंजीनियरिंग, Software Development, Artificial Intelligence और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में। जर्मनी का Opportunity Card कार्यक्रम भी भारतीयों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। गैर-European Union देशों के कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत जारी किए गए कुल परमिटों में लगभग एक-तिहाई भारतीयों को मिले हैं।
दील की अर्थशास्त्री Lauren Thomas के अनुसार, वैश्विक प्रतिभाएं अब केवल कुछ पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया के कई नए और उभरते बाजारों की ओर भी बढ़ रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है, जहां विदेशों में प्रशिक्षित और अनुभव प्राप्त पेशेवर घरेलू अवसरों के विस्तार के कारण वापस भारत लौटने लगेंगे। इससे देश के तकनीकी, डिजिटल और नवाचार क्षेत्रों को और मजबूती मिलने की संभावना है।

